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कविता (गीत) : नाथ सोनांचली

जब उमड़ते भाव अविरल अश्रु का संसार लेकर
तब कहीं कविता उपजती शब्द का आकार लेकर

पीर के परिमाप से करके स्वयं का 'नाथ' तर्पण
रात दिन पीड़ा दबाए आत्म का करके समर्पण
दर्द की अभिव्यंजना से कुछ नई गढ़ कल्पनाएँ
चित्र छपते जब हृदय पर कुछ नए किरदार लेकर
तब कहीं कविता उपजती शब्द का आकार लेकर

तप्त धरती बादलों की जिस घड़ी करती प्रतीक्षा
दर्द में  डूबे  हृदय  की  वास्तविक  होती  परीक्षा
याचना करता पपीहा और बिछुड़न के हृदय से
छेड़ती है राग विरहन जब विरह का प्यार लेकर
तब कहीं कविता उपजती शब्द का आकार लेकर

प्रेम अंकुर प्रस्फुटित जब द्वय हृदय के मध्य होता
वर्जनाएँ टूट जाती हिय विरह का बीज बोता
पादपों के पात बजते पायलों में होड़ मचती
प्रिय मिलन की रागिनी बजती प्रणय का ज्वार लेकर
तब कहीं कविता उपजती शब्द का आकार लेकर

नाथ सोनांचली
(मौलिक और अप्रकाशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 14, 2025 at 5:01pm

दुःख और कातरता से विह्वल मनस की विवश दशा नम-शब्दों की रचना के होने कारण होती है. इसे सुन्दरता से प्रस्तुत किये जाने का प्रयास हुआ है, आदरणीय नाथ सोनांचली जी. हार्दिक बधाइयाँ. 

 

यह अवश्य है, कि कविता का कलेवर द्रुत गति से बदल रहा है. या, कई अर्थों में बदल चुका है. इन अर्थों में कविता (गीत) के शब्दों की बुनावट पुरानी रचनाओं के अनुरूप है जिसे साहित्यिक आंगन में आज बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता. ऐसा नहीं है, कि रचनाओं के मर्म को, इसकी विशिष्टता को, मान न दिया जाय. परंतु, यह भी सत्य है, कि कविताओं का काल-खण्ड अवश्य ही बदल चुका है, इसके प्रति सभी सचेत रचनाकारों को संवेदनशील होना ही चाहिए.  

 

एक बात और, 

’वर्जनाएँ टूट जाती..’  में जातीं का होना उचित है. यह आप भी जानते हैं और यह एक टंकण-त्रुटि के कारण ही हुआ है. किन्तु, अपनी प्रस्तुतियों के प्रति आग्रही होना प्रत्येक रचनाकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. 

इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.  

शुभातिशुभ

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 27, 2025 at 5:04am

आ. भाई नाथ सोनांचली जी, सादर अभिवादन। अच्छा गीत हुआ है। हार्दिक बधाई।

Comment by Chetan Prakash on January 24, 2025 at 6:42pm

बहुत सुन्दर शास्त्रीय गीत का सृजन हुआ,  भाई,  नाथ सोनाक्ष, बधाई,  आपको, श्री  !

Comment by Ravi Shukla on January 24, 2025 at 2:42pm

आदरणीय सुनेन्द्र नाथ जी उत्तम गीत के लिये बहुत बहुत बधाई 

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