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भूख का व्यापार मत करवाइए- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२
कायराना  काम  कोई  यार  मत करवाइए
हर नदी नाले को हम से पार मत करवाइए।१।
*
शेर पाला है तो शेरों से लड़ाओ खूब पर
गीदड़ों से तो उसे दो-चार मत करवाइए।२।
*
वीरता की धार इससे कुंद सी पड़ जायेगी
रोजमर्रा दुश्मनों   से   प्यार मत करवाइए।३।
*
जाति धर्मों  के  लवादे  में  सियासत हेतु यूँ
नित्य अपनों से तो इतनी रार मत करवाइए।४।
*
चापलूसों को जमाकर रंग रोगन बस करो
ऐसे अपना खोखला आधार मत करवाइए।५।
*
प्रेम हमको देश से ढब आड़ में इसकी मगर
इतना मँहगा भूख का व्यापार मत करवाइए।६।

मौलिक अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 17, 2021 at 6:00am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on July 10, 2021 at 3:01pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 10, 2021 at 1:55pm

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और मनभावन प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 10, 2021 at 11:26am

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, 'हर नदी नाले को हम से पार मत करवाइए' बढ़िया है,

'शेर पाला है तो शेरों से लड़ाओ खूब पर

गीदड़ों से तो उसे दो-चार मत करवाइए।२।

'चापलूसों को जमाकर रंग रोगन बस करो

ऐसे अपना खोखला आधार मत करवाइए।५। वाह!  बहुत ख़ूब अशआर हुए हैं। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 10, 2021 at 6:51am

आ. भाई राहुल जी, हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 9, 2021 at 9:00pm

शेर पाला बहुत सुन्दर 

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