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मुक्‍तक- 1

भला होता है वो कैसा जिसे सब प्‍यार कहते है
नही यह भी पता मुझको किसे सब यार कहते है
न जाना मैं कभी इनको न पहचाना कभी इनको
यही कारण मुझे सब आदमी बेकार कहते है

मुक्‍तक -2
नही होता अगर ये दिल तो हम भी शान से जीते
लड़ा कर जाम से हम जाम तुम्‍हारे साथ में पीते
मगर कमबख्त दिल मेरा हमेशा नाम ले उसका
भुलाने ही नही देता पलों को साथ जो बीते

मुक्‍तक -3
करू क्या काम दिन भर मै मुझे पत्नी बताती है
झुका कर के नज़र चलना मुझे हरदम सिखाती है
नज़र मेरी चली जाये अगर अपनी पड़ोसन पे
चला बेलन वही दिन में मुझे तारे दिखाती है

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 5, 2015 at 12:05am

भइया, आप कहाँ हैं ? कहाँ पहुँच गये ? आजकल आपकी उपस्थिति मंच पर भी कम हो गयी है. 

सब शुभ होगा.  हार्दिक शुभेच्छाएँ.

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:20pm

आदरणीयSaurabh Pandeyजी उत्‍साहवर्धन के लिए चरण स्‍पर्श है आज मैं जहॉं तक पहुँच पाया हूँ उसमें आपका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन्‍ा मेरे साथ रहा है आपको चरण स्‍पर्श

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:18pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं चरण स्‍पर्श, आप की रचनाछप चुकी है 6 जून को पुस्‍तक आते ही आपके पास भेज दिया जायेगा गा और उसके उपरान्‍त गहमर में होने वाले अखिल भारतीय साहित्‍यकार सम्‍मेलन हेतु  संम्‍पर्क करेंगें 

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:16pm

आदरणीय narendrasinh chauhan जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं नमन

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:16pm

आदरणीयSamar kabeer जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं नमन

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:13pm

आदरणीयkrishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं नमन

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:13pm

आदरणीय shikha kaushik जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं नमन

Comment by Akhand Gahmari on June 4, 2015 at 6:12pm

आदरणीय शिज्‍जू शकूर जी उत्‍साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार एवं नमन


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 28, 2015 at 8:28pm

आपकी रचनाओं में हुआ सुधार आश्वस्त करता है अखण्ड भाईजी कि आपका प्रयास सदिश है.

हार्दिक शुभकामनाएँ.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 28, 2015 at 12:19pm

गहमरी जी

हास्स्य प्रधान मुक्तकों के लिए बधाई. मित्र आपके पत्रिका नहीं मिली और मेर्री कहानी का क्या हुआ ?

कृपया ध्यान दे...

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