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उल्‍टा श्रृंगार

लगाये आँख में लाली सुबह वो पास आती है
दिखा कर पाँव के कंगना खुशी से मुस्‍कुराती है।

कहे कैसी सजी हूँ मैं लगा कर मॉंग में काजल
तुम्‍हें मैं प्‍यार करती हूँ समझना मत मुझे पागल
लगाती नाक पर बिन्‍दियॉं अदा उसकी निराली है
जला कर दिन में वो दीपक कहे मुझसे दिवाली है
बजा कर हाथ की पायल मुझे हरदम सताती है
दिखा कर पाँव के कंगना खुशी से मुस्‍कुराती है।

लगाये आँख में लाली सुबह वो पास आती है

न पूछो बात तुम उसकी बड़ी सीधी बड़ी न्‍यारी
लगाये  गाल में अतला मुझे लगती बड़ी प्‍यारी
गुलाबी होठ हैं उसके पहनती है नया झुमका
अगर आवें कभी भाई लगाती झूम के ठुमका
खिलाने को उसे बकरा मुझे चूना लगाती है
दिखा कर पाँव के कंगना खुशी से मुस्‍कुराती है।

लगाये आँख में लाली सुबह वो पास आती है

पहनती नाक गजरा हमेशा लाल फूलों का
टंगी तस्‍वीर पर मेरी चढ़ाती हार शूलों का
करेगा काम ये तेरा बताया काले थापा ने
खरीदा है तभी मैने दिया दस लाख पापा ने
खड़ा कर सामने मुझको वो सखियों से बताती है
दिखा कर पाँव के कंगना खुशी से मुस्‍कुराती है।

लगाये आँख में लाली सुबह वो पास आती है

अखंड गहमरी मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2015 at 2:08pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी आपको नमन, टाइप करते समय में शब्‍द छूट गया है, जिसे सही करा लेगें हम

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 17, 2015 at 12:01pm

आ0 अखंड भाई जी,    सुंदर रचना .  हार्दिक  बधाई.  लेकिन यहा पर गति अवरोध  है....पहनती नाक गजरा.....इसे यू  करके देखिये.......पहन नाक में गजरा../ सादर

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