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'ग़ालिब' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2'

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन

लोग हैरान थे,रिश्ता सर-ए-महफ़िल बाँधा

उसने जब अपनी रग-ए-जाँ से मेरा दिल बाँधा

हर क़दम राह मलाइक ने दिखाई मुझ को

मैंने जब अज़्म-ए-सफ़र जानिब-ए-मंज़िल बाँधा

जितने हमदर्द थे रोने लगे सुनकर देखो

अपने अशआर में जब मैंने ग़म-ए-दिल बाँधा

जल गये जितने सितारे थे फ़लक पर यारो

अपनी ज़ुल्फ़ों में जब उसने मह-ए-कामिल बाँधा

शुक्र तेरा करें किस मुंह से बता ऐ यारब

तूने चाहत की रसन से हमें शामिल बाँधा

तुझ पे क़ुर्बान मुसव्विर तेरे फ़न पर क़ुरबाँ

तूने मंज़र मेरे मिट जाने का तिल-तिल बाँधा

कर्बला वालों की तारीख़ "समर" याद आई

उसने जब तिश्ना लबों को लब-ए-साहिल बाँधा

-----

मलाइक--फ़रिश्ते

फ़लक--आकाश

मह-ए-कामिल--पूरा चाँद

रसन--रस्सी

मुसव्विर--चित्रकार

तिश्ना लबों--प्यासों

लब-ए-साहिल--किनारे

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 29, 2018 at 8:02am

आदरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपकी गजल पढ़कर बहुत आनंद की अनुभूति हुई ,कमाल की गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये 

Comment by Samar kabeer on May 7, 2018 at 6:13pm

जनाब रवि शुक्ला जी आदाब, ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Ravi Shukla on May 7, 2018 at 5:50pm

वाह वाह आदरणीय समर क्या अंदाज़े बयाँ है आपकी ग़ज़ल में हर शेर अपनी रवानी और कथ्य की गहराई के साथ मौजूद है ग़ज़ल में । दिली शुक्रिया आपका । मुबारक बाद कुबूल करें ।

Comment by Samar kabeer on March 30, 2018 at 4:53pm

जनाब डॉ.आशुतोष मिश्रा जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 30, 2018 at 1:50pm

आदरणीय समर सर ..उम्दा शेरो की इस ग़ज़ल पर आपको हार्दिक बधाई ..आपकी ग़ज़ल और आपनी प्रतिक्रियाओं से बहुत कुछ सीखने को मिलता है सादर प्रणाम के साथ जितने हमदर्द थे रोने लगे सुनकर देखो

अपने अशआर में जब मैंने ग़म-ए-दिल बाँधा..ये शेर बेहद पसंद आया 

Comment by Samar kabeer on March 29, 2018 at 11:29am

जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,ग़ज़ल पर टिप्पणी देकर आपने उसे काट क्यों दी,समझ नहीं सका

Comment by दिनेश कुमार on March 29, 2018 at 5:34am

निहायत उम्दा ग़ज़ल हुई  है, आदरणीय समर सर। मतले से मक़्ते तक सभी शेर बख़ूबी बाँधे गए हैं। हार्दिक बधाई !! वाह वाह

Comment by Samar kabeer on March 28, 2018 at 9:48pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 28, 2018 at 9:21pm

वाह सर बेहतरीन शेरों से सजी ग़ज़ल अप्रतिम लगी। हार्दिक बधाई आपको । मन प्रसन्न हुआ ।

Comment by Samar kabeer on March 28, 2018 at 5:53pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब आदाब, ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

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