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लघु - कवितायें - 01 - डॉo विजय शंकर

तालाब की दुर्गन्ध
दूर दूर तक फ़ैली थी ,
वो कुछ मछलियों
के भाग जाने का
हवाला दे रहे थे।
**********************
लोग जितने नासमझ होगे
उतनी आप की बात मानेंगे।
लोग जितने टूटेंगे ,
आप उतने मजबूत होंगे।
आप जितनी रोटियां बाटेंगे ,
लोग उतने आपके होंगे।
***********************
राम का नाम सत्य है ,
कभी राम का निर्वासन हुआ ,
आज सत्य का हुआ है।
कारण तब भी राजनैतिक थे ,
अब भी राजनैतिक है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by maharshi tripathi on June 15, 2016 at 5:15pm
क्या वात है सर,ज़रूरी नही बड़ी कविता में ही भाव रख सकते हैं,छोटे रुप में भी भाव रख सकते हैं,
इस कविता हेतु बधाई आपको !!!!
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 14, 2016 at 9:35pm

आ० विजय भाई जी,  इन सुंदर क्षणिकाओं के लिये आपको बहुत-बहुत बधाई ....सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 14, 2016 at 8:29pm
आदरणीय सुश्री प्रतिभा पांडेय जो , आपके सार्थक विश्लेषण और सद्भावनाओं के लिए ह्रदय से आभार तथा धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 14, 2016 at 8:29pm
आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी, आपके प्रसंशात्मक विश्लेषण एवं आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 14, 2016 at 8:24pm
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, आपके विश्लेषण एवं आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 14, 2016 at 8:24pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by pratibha pande on June 14, 2016 at 7:37pm

लोग जितने नासमझ होगे
उतनी आप की बात मानेंगे।
लोग जितने टूटेंगे ,
आप उतने मजबूत होंगे।
आप जितनी रोटियां बाटेंगे ,
लोग उतने आपके होंगे।...... ये ही हो रहा है आज ,सहूलियतें और तुष्टिकरण से  लोगों को कमज़ोर बनाया जा रहा है .  आपकी गहन सोच से पगी है ये रचना ,  हार्दिक बधाई प्रेषित है आपको आदरणीय    सादर   

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 14, 2016 at 5:37pm

आदरणीय विजय सर ..सभी रचनाएँ बेहद भाई. व्लोग जितने नासमझ होगे
उतनी आप की बात मानेंगे।
लोग जितने टूटेंगे ,
आप उतने मजबूत होंगे।
आप जितनी रोटियां बाटेंगे ,
लोग उतने आपके होंगे। ये पंक्तियाँ तो लाजबाब है इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 14, 2016 at 2:18pm
कड़वा सत्य बख़ूबी शाब्दिक करती बेहतरीन सृजन के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।
Comment by Shyam Narain Verma on June 14, 2016 at 12:43pm
बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति , बधाई आप को | सादर 

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