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बेटी दिवस पर दोहा ग़ज़ल. . . .

बेटी दिवस पर दोहा ग़ज़ल ....

बेटी घर की आन है, बेटी घर की  शान ।
दो दो कुल संवारती, बेटी  की  मुस्कान ।।

बेटी को  मत  जानिए, बेटे  से  कमजोर ,
जग में बेटी आज है, उन्नति की पहचान ।

बेटे को जग वंश का, समझे दावेदार,
बेटे से कम  आंकता, बेटी के अरमान ।।

धरती अरु आकाश पर , लिख दी अपनी जीत,
बेटी ने अब छू लिया , धरा से आसमान ।।

बेटी अबला अब हुई, अतुल शक्ति पर्याय ,
उसके साहस को करे, नमन सारा जहान ।।

सुशील सरना / 25-9-23

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on October 2, 2023 at 10:08pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । सहमत
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 1, 2023 at 11:10pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। 

अबला बेटी करने से वाक्य रचना अधिक उपयुक्त लगेगी देखिएगा। सादर...

Comment by Sushil Sarna on September 28, 2023 at 8:20pm
आदरणीय विजय शंकर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by Dr. Vijai Shanker on September 26, 2023 at 8:43pm

धरती अरु आकाश पर , लिख दी अपनी जीत,
बेटी ने अब छू लिया , धरा से आसमान ।।

आदरणीय सुशील सरना जी, बेटियों को यथोचित पहचान देती हुई इस रचना के लिए हार्दिक बधाई, रचना बहुत सुंदर हुई है , सादर .

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