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221 - 2122 - 221 - 2122 

आया है चाट वाला ले कर गली में ठेला

आते ही लग गया है बच्चों का जैसे मेला 

अम्मा से पैसे लेके दौड़ी जो बिटिया रानी 

सुनकर ही आ गया है चच्ची के मुँह में पानी

भाभी भी हो रहीं ख़ुश भय्या मँगा रहे हैं 

खाते नहीं मगर वो सबको खिला रहे हैं 

टन-टन तवा बजाता कर्छी से चाट वाला

कहता है आओ बाजी आओ जी मेरी ख़ाला

गर्मा-गरम पकौड़े चटनी है खट्टी-मीठी 

रगड़ा-मसाला खा के मुँह से निकलती सीटी

आवाज़ पपड़ियों की कानों को भा रही है 

आलू की टिक्कियों की छुन-छुन लुभा रही है 

छोले कमाल के हैं ख़स्ता-कचौरी खाओ 

आलू मसाले वाले और भेल-पूरी खाओ 

जिसने दही-बड़े और खाये न पानी-पूरी 

झूठी है उसकी मस्ती और चाट भी अधूरी 

होता न सब्र जिन को वो जा के चाट खाएँ

वर्ना 'अमीर' की बस ये नज़्म गुनगुनाएँ

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 27, 2023 at 7:43am

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, नज़्म पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 25, 2023 at 7:26am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुन्दर नज्म हुई है। बहुत बहुत बधाई ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 11, 2023 at 8:43pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आदाब, नज़्म पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।

Comment by Shyam Narain Verma on July 10, 2023 at 11:09pm
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर नज़्म , हार्दिक बधाई l सादर

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