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लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

(2122 1212 22/122)

लोग घर के हों या कि बाहर के
प्यार करिएगा उनसे जी भर के

जाने क्या कह दिया है क़तरे ने
हौसले पस्त हैं समंदर के

जिस्म पर जब कोई निशाँ ही नहीं
कौन देखेगा ज़ख़्म अंदर के

दोस्ती उन से कर ली दरिया ने
जो थे दुश्मन कभी समंदर के

एक शीशे से ख़ौफ़ खाते हैं
लोग जो लग रहे थे पत्थर के

एक बस माँ को बाँट पाए नहीं
घर के टुकड़े हुए बराबर के

गरचे हर घर की है कहानी ये
सिर्फ़ चर्चे हुए मिरे घर के

यूँ तो पाबंदियाँ है उड़ने पर
पर निकल आए हैं कबूतर के

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by सालिक गणवीर on August 11, 2020 at 9:41am

मुहतरमा डिंपल शर्मा जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by Dimple Sharma on August 8, 2020 at 12:19pm

आदरणीय हर शेर कमाल है समझ नहीं आ रहा किसे ज्यादा दाद दूं, बस मतला कमजोर लग रहा है , इस ग़ज़ल ने दिल ले लिया वाह बहुत उम्दा आदरणीय।

Comment by Dimple Sharma on August 8, 2020 at 12:18pm

आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब,इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by सालिक गणवीर on August 5, 2020 at 11:29am

भाई बृजेश कुमार'ब्रज'
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2020 at 10:02pm

बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई ज़नाब सालिक जी...

Comment by सालिक गणवीर on August 4, 2020 at 6:28pm

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by सालिक गणवीर on August 4, 2020 at 6:27pm

मुहतरमा 'महक' जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 4, 2020 at 5:53pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । इस लाजवाब गजल के लिए ढेरों बधाईयाँ ।

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 3, 2020 at 9:21pm
आदरणीय सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार।
बहुत ही भावपूर्ण व सुन्दर ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद।
Comment by सालिक गणवीर on August 3, 2020 at 2:55pm

भाई सुरेश नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

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