For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नादिर ख़ान's Blog (47)

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी

जब से मजबूरी मेरी बढ़ने लगी

दोस्तों से दूरी भी बनने लगी

 

उनकी हाँ में हाँ मिलाया जब नहीं 

बस मेरी मौजूदगी डसने लगी

 

कद मेरा उस वक्त से बढ़ने लगा

आजमाइस दुनिया जब करने…

Continue

Added by नादिर ख़ान on February 18, 2013 at 10:00pm — 21 Comments

यूँ लड़ते हुये हम कहाँ तक गिरेंगे

ज़हर भर चुका है दिलों में हमारे
सभी सो रहे है खुदा के भरोसे

जुबां बंद फिर भी अजब शोर-गुल है
हैं जाने कहाँ गुम अमन के नज़ारे

धरम बेचते हैं धरम के पुजारी
हमें लूटते हैं ये रक्षक हमारे

भला कब हुआ है कभी दुश्मनी से
बचा ही नहीं कुछ लुटाते-लुटाते

बटा घर है बारी तो शमशान की अब
यूँ लड़ते हुये हम कहाँ तक गिरेंगे

धरम का था मतलब खुदा से मिलाना
खुदा को ही बांटा धरम क्या निभाते

Added by नादिर ख़ान on February 10, 2013 at 12:30am — 7 Comments

फासला

मेरे आने और तुम्हारे जाने के बीच

बस चंद कदमों का फासला रहा

न मै जल्दी आया कभी

न कभी तुमने इंतज़ार किया

ये फासला ही तो था

जिसे हमने

संजीदगी और ईमानदारी के साथ निभाया

फासले को…

Continue

Added by नादिर ख़ान on February 1, 2013 at 11:30am — 15 Comments

फांसले दिल के अब मिटते नहीं हैं हमसे

प्यार ने तेरे बीमार बना रखा है
जा चुके कल का अख़बार बना रखा है

फांसले दिल के अब मिटते नहीं हैं हमसे
चीन की खुद को दीवार बना रखा है

बेचकर गैरत अपनी सो चुके हैं कब के 
हमने उनको ही सरदार* बना रखा है

शोर सा मेरे इस दिल में ऐसा मचा है
जैसे गठबंधन सरकार बना रखा है

चापलूसों का दरबार लगा है नादिर
झूठ को ही कारोबार बना रखा है

*सरदार = मुखिया

Added by नादिर ख़ान on January 24, 2013 at 5:30pm — 5 Comments

कोई सपना सुहाना चाहता हूँ

कोई  सपना  सुहाना  चाहता  हूँ

बच्चों  का  डर  हटाना चाहता हूँ

 

तुमने खामोश आँखों से कहा जो

उन शब्दों को चुराना  चाहता हूँ

 

डर ज़ुल्मों का भला क्यों-कर करें हम

जो सच है वो सुनाना चाहता हूँ

 

जिसने ले ली गरीबों की रोटी भी

फ़ांका उसको कराना  चाहता हूँ

 

उलझे सब नालियों पर और कीचड़

मैं सागर से हटाना चाहता हूँ

 

नहीं “नादिर” शिकायत ज़िंदगी से

जिम्मेदारी निभाना  चाहता  हूँ

Added by नादिर ख़ान on January 18, 2013 at 5:00pm — 5 Comments

दामिनी तुम जिंदा हो

दामिनी तुम जिंदा हो

हर औरत का हौंसला बनकर

न्याय की आवाज़ बनकर

वक्त की ज़रूरत बनकर

आस्था की पुकार बनकर

एकता की मिसाल बनकर

तुम लाखों दिलों में जिंदा हो

न्याय की उम्मीद बनकर…

Continue

Added by नादिर ख़ान on January 1, 2013 at 10:25pm — 8 Comments

विकास बनाम इंसानियत – दर

रोज़ होती रही चर्चायें

बैठकों पे बैठकें

कार्यालयों से लेकर चौपालों तक

कारखानों से लेकर शेयर बाज़ारों तक

हर जगह

कोशिशें जारी हैं

कैसे बढ़े

कितना बढ़े

कहाँ-कहाँ कितनी गुंजाईशें है

सभी लगे हैं

देश विकसित हो या विकासशील

या हो अविकसित

मगर चिंतायें

सबकी एक है

कैसे बढ़े विकास-दर

कैसे बढ़े व्यापार

बाज़ार भाव

कैसे बढ़े निर्यात

फिर चाहे

मौत का सामान ही क्यों न हो

व्यापार बढ़ना चाहिए

विकास-दर बढ़ती…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 28, 2012 at 11:00pm — 3 Comments

शैतान हँस रहा है

लड़की चीख़ी

चिल्लायी भी

मगर हैवानों के कान बंद पड़े थे

नहीं सुन पाये

उसकी आवाज़ का दर्द

 

वह रोयी बहुत

आँखों से उसके

झर-झर आँसू…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 21, 2012 at 12:24am — 2 Comments

आओ वालमार्ट

आओ वालमार्ट 

स्वागत है आपका

अपनी कमज़ोर हो रही 

अर्थव्यवस्था को

मज़बूत करने

आओ

हमारी मज़बूत होती

अर्थव्यवस्था को

कमज़ोर करने

आओ

 

हमने आपके हथियार नहीं लिए

इस नुक्सान की भरपायी के लिए

नयी संभावनाओं को तलाशने

आओ

किसानों के पसीने निचोड़ने

गरीब जनता का ख़ून चूसने

आओ वालमार्ट

 

यूनियन कार्बाइड की याद

धुंधली पड़ चुकी है

तुम नयी यादें देने…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 14, 2012 at 11:00am — 3 Comments

सब तो यहाँ हैं अजनबी

हाँ प्यार से इकरार है

पर शिर्क से इंकार है

 

अब दिल में वो जज़्बा नहीं

बस प्यार का बाज़ार है 

 

मेरा ठिकाना क्या भला

जब बिक चुका घर-बार है…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 10, 2012 at 5:00pm — 6 Comments

रेत में जैसे निशां खो गए

रेत में जैसे निशां खो गए

हमसे तुम ऐसे जुदा हो गए

 

रात आँखें ताकती ही रहीं

मेहमां जाने कहाँ सो गए

 

सौंप दी थी रहनुमाई जिन्हें

छोड़कर मझधार में खो गए…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 5, 2012 at 4:30pm — 11 Comments

दिल में खौफ़े खुदा भी लाया जाए

दिल में खौफ़े खुदा भी लाया जाए

अच्छे बुरे का फर्क जाना जाए

कब्ल इसके उंगली उठाओ सब पर

अपने दिल को भी तो खंगाला जाए

यूँ तो उनकी की है फजीहत सबने

प्यार उनसे कभी जताया जाए

निकले बाहर गरीबों की आवाज़ें

उनको भी तो कभी सुन लिया जाए

पहले इसके बिगड़ जायें हालात

जुल्मों को वक़्त रहते रोका जाए 

Added by नादिर ख़ान on November 30, 2012 at 10:35pm — 4 Comments

मंज़िल अभी दूर है

तैयार किए गए

कुछ रोबोट

डाले गए

नफरत के प्रोग्राम

चार्ज किए गए

हैवानियत की बैटरी से

फिर भेज दिये  गए  

इंसानों की बस्ती में

फैलने आतंक

 

ये और बात है

इंसानियत ज़िंदा रही

हार गए हैवान

नहीं डरा सके हमें

न हीं कमज़ोर कर सके

हमारा आत्मविश्वास

 

और…

Continue

Added by नादिर ख़ान on November 22, 2012 at 11:53am — 9 Comments

आज करना कुछ नया-सा चाहता हूँ

आज करना कुछ नया-सा चाहता हूँ

आस के जज़्बात भरना चाहता हूँ

 

ये ग़ज़ल मेरी अधूरी है अभी तक

बस तेरी ख़ुशबू मिलाना चाहता हूँ

 

शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी

दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

 

ख़ौफ़जद है ज़िंदगी अब तो हमारी

प्यार के कुछ रंग भरना चाहता हूँ 

 

दुश्मनों ने दोस्त बन कर जो किया था

गलतियाँ उनकी भुलाना चाहता हूँ

(मात्रा  2122  2122  2122  की कोशिश की है ।)

Added by नादिर ख़ान on November 20, 2012 at 11:00pm — 6 Comments

गिरती दीवारें सूने खलिहान है

गिरती दीवारें सूने खलिहान है
गावों की अब यही पहचान है

चौपालों में बैठक और हंसी ठट्ठे
छोटे छोटे से मेरे अरमान है

जनता के हाथ आया यही भाग्य है
आँखों में सपने और दिल परेशान है

लें मोती आप औरों के लिये कंकड़
वादे झूठे मिली खोखली शान है

हम निकले हैं सफर में दुआ साथ है
मंजिल है दूर रस्ता बियाबान है

Added by नादिर ख़ान on November 16, 2012 at 4:30pm — 12 Comments

तेरा था कुछ, न मेरा था

तेरा था कुछ और न मेरा था

दुनिया का बाज़ार लगा था

मेरे घर में आग लगी जब

तेरा घर भी साथ जला था

 

अपना हो या हो वो पराया

सबके दिल में चोर छिपा था

 

तुम भी सोचो मै भी सोचूँ

क्यों अपनों में शोर मचा था 

 

टोपी - पगड़ी बाँट रहे थे

खूँ का सब में दाग लगा था

मै भी तेरे पास नहीं था

तू भी मुझसे दूर खड़ा था

Added by नादिर ख़ान on November 12, 2012 at 11:17pm — 1 Comment

मेरा बेटा (2)

मेरा बेटा

अभी बच्चा है

अक़्ल से कच्चा है

चीज़ों का महत्व

नहीं जानता

और न ही

बड़ी बातें करना जानता है

उसकी खुशियाँ भी

छोटी-छोटी हैं

चॉकलेट, खिलौनों से ख़ुश

पेट भर जाए तो ख़ुश

पर लालची नहीं है वो

उतना ही खाएगा

जितनी भूख़ है

कल के लिए नहीं सोचता

आज की फिक्र करता है

चीज़ें ज़्यादा हो जायें

दोस्तों में बाँट देगा

छोटा है न

कुछ समझता नहीं

लोग समझाते हैं

बाद के लिए रख लो

पर नहीं समझता…

Continue

Added by नादिर ख़ान on November 8, 2012 at 6:00pm — 4 Comments

मेरा बेटा

मेरा बेटा

छोटा है

महज़ छ: साल का

मगर

खिलौने इकट्ठे करने में

माहिर है

और खिलौने भी क्या ?

दिवाली के बुझे हुये दिये

अलग-अलग किस्म की

पिचकारियाँ

हाँ कई रंग भी है

उसके मैंजिक बॉक्स में

लाल, हरे, पीले

मगर रंगों मे फर्क

नहीं जानता

बच्चा है न

नासमझ है

होली में

पूछेगा नहीं

आपको कौन सा रंग पसंद है

बस लगा देगा

बच्चा है न

नासमझ है

हरे और पीले का फर्क

अभी नहीं जानता

उसे तो ये भी नहीं पता

होली का…

Continue

Added by नादिर ख़ान on November 5, 2012 at 3:30pm — 7 Comments

दुख (हाईकु)

सूखती नदी

उजड़ते मकान

अपना गाँव

 

कैसा विकास

लोगों की भेड़ चाल

सुख न शांति

 

गाँवों में बसा  

नदियों वाला देश

पुरानी बात 

सूखती नदी

बढ़ता गंदा नाला

मेरा शहर 

बिका सम्मान

क्या खेत खलिहान

दुखी किसान 

लोग बेहाल

गिरवी जायदाद

कहाँ ठिकाना 

सड़े अनाज

जनता है लाचार

सोये सरकार 

Added by नादिर ख़ान on October 30, 2012 at 6:00pm — 3 Comments

रूठ मै जाऊँ तो मनाना मुझको

रूठ मै जाऊँ तो मनाना मुझको

जो गिरता हूँ तो उठाना मुझको

 

मैंने मोहब्बत ही सबसे की है

गर हो खता खुदा बचाना मुझको

 

तुम्हारी हरेक शर्त मंजूर है मुझे

हाथ पकड़ के कभी बिठाना मुझको

 

बड़ी ही नाज़ुक है यादें हमारी

दीवारों पर यूँ न सजाना मुझको

 

दिल के कमज़ोर होते हैं इश्क वाले

बुरी नज़र से सबकी बचाना मुझको

 

साथ माँ-बाप का किसे अच्छा नहीं लगता 

मेरी मजबूरीयों से ए-रब बचाना…

Continue

Added by नादिर ख़ान on October 21, 2012 at 10:30am — 2 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service