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Saurabh Pandey's Blog – December 2012 Archive (3)

नव वर्ष मंगलमय हो.. .

चिड़िया थी उत्साह में, सम्मुख था आकाश

किन्तु स्वप्न धूसर हुए, तार-तार विश्वास !

तार-तार विश्वास,  मगर जीवन  चलता है.. .…

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Added by Saurabh Pandey on December 31, 2012 at 7:30pm — 28 Comments

प्रयाग में कुंभ (मत्तगयंद सवैया) // -सौरभ

बालक-वृंद सुनैं, यह भारत-भूमि सदा सुख-साध भरी है

पावन चार नदी तट हैं, इतिहास कहे छलकी ’गगरी’ है

नासिक औ हरिद्वार-उजैन क घाट प बूँद ’अमी’ बिखरी है

धाम प्रयाग विशेष सदा जहँ धर्म-सुकर्म ध्वजा फहरी है



पुण्यधरा तपभूमि महान जो बारह साल प कुंभ सजावैं

तीनहुँ…

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Added by Saurabh Pandey on December 26, 2012 at 12:30am — 48 Comments

नवगीत - चाहना // -- सौरभ

छू दो तुम.. . / फिर

सुनो अनश्वर ! 



थिर निश्चल

निरुपाय शिथिल सी

बिना कर्मचारी की मिल सी

गति-आवृति से

अभिसिंचित कर

कोलाहल भर

हलचल हल्की.. .

अँकुरा दो

प्रति विन्दु देह का   

लिये तरंगें

अधर पटल पर.. . !



विन्दु-विन्दु जड़, विन्दु-विन्दु हिम

रिसूँ अबाधित 

आशा अप्रतिम.. .

झल्लाये-से चौराहे पर

किन्तु चाहना की गति …

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Added by Saurabh Pandey on December 17, 2012 at 6:00pm — 29 Comments

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