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Chetan Prakash's Blog – August 2021 Archive (3)

ग़ज़ल

1212     1122     1212     22 / 112

मेरे  अपनों  का  ही खंजर मेरी तलाश में है ।

जिन्हें बनाया था अफसर मेरी तलाश में है ।।

जड़ों को सींच रहा हूँ शुरू से ओ बी ओ की,

नये  आए हैं  वो  चाकर  मेरी तलाश  में हैं ।

जताते झूूठा वो हक़ जो ग़ज़ल की शोहरत पर,

उन्हीं  के  हाथ  का  पत्थर  मेरी  तलाश में है ।

बहुत गुमान है उनको तो जन्म के शहर का,

नगर का हूँ  मैं तो रहबर  मेरी  तलाश  में हैं ।

जहाँ में सच…

Continue

Added by Chetan Prakash on August 24, 2021 at 7:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

रहगुज़र को मेरी कारवाँ दे गया....

212     212     212     212

रहगुज़र  को  मेरी कारवाँ  दे गया

वो खुदी  को अभी पासवाँ दे गया

मुफलिसी वो बुरा ख्वाब थी ज़िन्दगी 

था खुदा जात वो कहकशाँ  दे  गया

आँख भर आए है याद कर के उसे

वो खुदा  था मुझे  बागवाँ  दे गया

ज़िन्दगी  को रज़ा की जबाँ दे गया

रास्ता  एक  था  दो  जहाँ  दे गया

जो बुरा ख्वाब  होता मुझे नींद में

वो बदल  कर नई दास्ताँ  दे…

Continue

Added by Chetan Prakash on August 7, 2021 at 6:00pm — No Comments

ग़ज़ल

2122     1212    22 / 112

आज  सोया है शहर घर कर के ! 

खूब  रोया  खुदा  महर  कर के  !!

क्या बुरा हो गया  सनम मुझ से

देखता कब है वो नज़र कर के  !

ज़हरीला बन गया हरेक रिश्ता याँ 

खत्म हो हर अजाब मर कर के  !

हम हैं मारे उसी की बेरुखी के

जिसको देखा नज़र वो भर कर के !

कोई है बात जो लगी दिल को

मिलता कोई नहीं खबर  कर के !

क्या करू मिल के ज़िन्दगी से मैं

खौलता  खून  है …

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Added by Chetan Prakash on August 3, 2021 at 12:46am — 2 Comments

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