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Sulabh Agnihotri's Blog – August 2013 Archive (4)

बहुत याद क्यों आज तू आ रही है ?

बहुत याद क्यों आज तू आ रही है ?



किसी ढीठ बच्ची सी नादानियों में

क्यों सुधियों के पन्नों को छितरा रही है ।

सुबह एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया

मेरे गाल पर फूल बिखरा गई थी ।

फुदकती हुई एक नन्हीं गिलहरी

थोड़ी देर गोदी में सुस्ता गई थी ।

अभी तक छुअन रेशमी-रेशमी सी

मेरे नर्म अहसास सहला रही है ।

मेरे सूने कमरे में कुछ देर खेलें

बुलाया था चंचल हवाओं को मैंने

मचलती चली आयें किलकारियाँ सब

कि खोला था मन की गुफाओं को…

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Added by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 10:14am — 14 Comments

ग़ज़ल

वो अपनेपन का सोता खोल दिल की हर गिरह निकले ।

कगारी फाँद ओंठों की सुरीला गीत बह निकले ।

लरजकर चूम ले माथा, हुमक कर बाँह में भर ले

वो बिछड़ी रात भर की धूप बौरी जब सुबह निकले ।

फकत दो बूँद ने भीतर तलक सारा भिगो डाला

हमारे दिल भी ये कच्चे मकानों की तरह निकले ।

इन्हें पोंछो तो पहले कैफियत पीछे तलब करना

हर आँसू बेशकीमत है वो चाहे जिस वजह निकले

इस अपनी आदमी की देह से इतनी कमाई कर

कि तेरे बाद भी तेरे लिये दिल में…

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Added by Sulabh Agnihotri on August 19, 2013 at 10:00am — 21 Comments

गीत की जन्मपत्री बनाते रहे

पीर पंचांग में सिर खपाते रहे ।

गीत की जन्मपत्री बनाते रहे ।

हम सितारों की चौखट पे धरना दिये

स्वप्न की राजधानी सजाते रहे ।

लाख प्रतिबंध पहरे बिठाये गये

शब्द अनुभूतियों के सखा ही रहे

आँसुओं को जरूरत रही इसलिये

दर्द के कांधे के अँगरखा ही रहे

श्वास की बाँसुरी बज उठी जब कभी

हम निगाहें उठाते लजाते रहे।

पर्वतों से मचलती चली आ रही,

गीत गोविन्द मुग्धा नदी गा रही,

पांखुरी-पांखुरी खिल गई रूप की

भोर लहरा रही, चांदनी गा…

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Added by Sulabh Agnihotri on August 4, 2013 at 4:00pm — 19 Comments

चांदनी फिर पिघलने लगी है

चांदनी फिर पिघलने लगी है

आँसुओं से धुली वो इबारत

गीत बनकर मचलने लगी है।

रोते-रोते हुए पस्त शिशु से,

भावना के विहग सो गये थे

सांझ की डाल सहमी हुई थी,

भोर के पुष्प चुप हो गये थे

फिर अचानक हुई कोई हलचल,

जैसे लहरा गया कोई आंचल

उनके दिल से उठी एक बदली

मेरी छत पे टहलने लगी है।

इक गजल पर तरह दी किसी ने,

भूला मुखड़ा पुनः गुनगुनाया

प्यार से साज की धूल झाड़ी,

मुद्दतों बाद फिर से उठाया

तार…

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Added by Sulabh Agnihotri on August 3, 2013 at 3:30pm — 25 Comments

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