For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog – March 2017 Archive (3)

ग़ज़ल....रही माँ पूछती आँसू बहा कर

1222 1222 122


मिलेगा क्या तुम्हें परदेश जा कर
रही माँ पूछती आँसू बहा कर

तड़पता छोड़कर तन्हा शजर को
परिंदा उड़ गया पर फड़फड़ा कर

बहल जाये विकल मासूम बचपन
नजर भर देख ले माँ मुस्कुरा कर

है पल पल टूटती साँसों की माला
बिता लो चार पल ये हँस हँसा कर

न जाओ छोड़कर 'ब्रज' कुंज गलियाँ
दरख्तों ने कहा ये कसमसा कर

.
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 27, 2017 at 11:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

212 212 212 212

अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

चलते चलते कदम रुक गये भीड़ में



मुख़्तलिफ़ दर्द में हम पुकारा किये

घुट गयी आह थे कहकहे भीड़ में



बाँह को थामकर हमने रोका बहुत

तुम गये भीड़ में खो गये भीड़ में



है सभी का मुकददर परेशानियाँ

दे किसे कौन अब मशविरे भीड़ में



मुंतज़िर हैं बड़े दिल ए नाशाद के

अनकहे प्यार के फलसफे भीड़ में



दिल के ज़ज्बात 'ब्रज' रायगाँ मत करो

फिर रहे हैं कई मसखरे भीड़ में

(मौलिक एवं… Continue

Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 19, 2017 at 7:30pm — 6 Comments

हिन्दी गीतिका...​साँसों का तरपन कर दूँ

22 22 22 22 22 22 22

रम जाओ अंतस में जीवन मधुरम चन्दन कर दूँ

जो तुम झाँको आँखों में आँखों को दरपन कर दूँ



तुम बिन जीवन मिथ्या है साँसों का आना जाना

बस जाओ मम साँसों में साँसों को अरपन कर दूँ



कल देखा था ख्वाबों में दुल्हन सी तुम मुस्काईं

पलकों में आ बस जाओ सपनों का तरपन कर दूँ



प्यासी धरती प्यासा अम्बर प्यासा है उर आँगन

छा जाओ बन के बदली मरुथल को मधुबन कर दूँ



​​पलकों में आकुल आँसू बहने को व्याकुल आँसू

बन साथी झरते आँसू पतझर… Continue

Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 5, 2017 at 7:34pm — 8 Comments

Monthly Archives

2025

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service