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Rahul Dangi Panchal's Blog – January 2015 Archive (7)

गजल- आन बान शान पर तो मर मिटो या मार दों!

२१२१ २१२१ २१२१ २१२



भारती की मूरती को आज फिर संवार दों!

आर्यवर्त की रिदा को दूध सा निखार दों!!



जिन्दगी ये देश की है देश पर निसार दों!

जितनी बार भी मिले कि उतनी बार वार दों!!



गाडते चलो अमर तिरंगे को सितारो तक!

मानचित्र हिन्द का ब्रह्माण्ड पे उभार दों!!



जो सिमट गये वतन की राह में वे कह गये!

आन बान शान पर तो मर मिटो या मार दों!!



लोग जो अभी तलक जगे नहीं जगा दो अब!

देश की गली गली में जाके तुम पुकार दों!!



पाश्च… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:26pm — 25 Comments

गजल-लोग अब आपका बोलते है मुझे!

212 212 212 212



आपके नाम से टोकते है मुझे!

लोग अब आपका बोलते है मुझे!!



रोज में इक नजर देखते भी नहीं!

रात में चाँद से पूछते है मुझे!!



जख्म के पेड को फिर हरा कर चले!

किस तराजू में वे तोलते है मुझे!!



मर गया हूँ मगर चैन अब भी नहीं!

आज तक भी कई कोसते है मुझे!!



नाम दिल से मिटा तो दिया पर सनम!

दर्द बेघर हुए घूरते है मुझे!!



लगता है सांस दो चार ही रह गयी!!

जिस नजर से सभी देखते है मुझे!!



पूछ 'राहुल'… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on January 20, 2015 at 9:10pm — 20 Comments

गजल- जान हो तुम मेरी जान लो जानेमन

212 212 212 212

एक है जान हम टुकडे दो जानेमन!
कैसे समझाए हम आपको जानेमन!!

हो नहीं सकते तुम दूर मुझसे कभी!
जान हो तुम मेरी जान लो जानेमन!!

तुम दुआ हो मेरी मेरे अरमान हो!
जिन्दगी बन्दगी तुम ही हो जानेमन!!

देख लूं जो तुझे साँस आ जाती है!
जाएँगे मर अगर तू न हो जानेमन!!

तुमको 'राहुल' पे अब भी यकीं गर नहीं!
चीर कर दिल मेरा देख लो जानेमन!!

मौलिक व अप्रकाशित!

Added by Rahul Dangi Panchal on January 16, 2015 at 10:26pm — 26 Comments

गजल- मुझे शायरी में पुकार दे!

११२ १२ ११२ १२



तु गजल में थोडा खुमार दे!

तु जरा सा और सँवार दे!!



तेरे लफ्ज तेरी जमीन है!

इन्हें आँसुओं से निखार दे!!



उसे भूल जा है जो बेवफा!

ये लिबास गम का उतार दे!!



यूं घुमा फिरा के न बात कर!

मुझे साफ साफ नकार दे!!



मैं बिगड गया मुझे डाँट माँ!

मेरी जिन्दगी को सुधार दे!!



या खुदा तु कह दे घटाओं से!

मेरे खेत को भी दुलार दे!!



कि मैं दफ्न हूँ मेरे शे'र में!

मुझे शायरी में पुकार… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on January 13, 2015 at 3:00pm — 44 Comments

गीत- जिन्दगी ये मेरी गम का जंजाल है

२१२ २१२ २१२ २१२



जिन्दगी ये मेरी गम का जंजाल है!

साल दर साल दिल का यही हाल है!!

मुझको तो इससे कुछ फर्क पडना नहीं!

ये गया साल है या नया साल है!!



स्याही किस्मत के उस पेज पर जा गिरी!

जिस पे तस्वीर थी मेरे दिलदार की!

या खुदा तुझसे ये क्या खता हो गयी!

मेरी किस्मत से वो अब जुदा हो गयी!

अब मुकद्दर मेरा दोस्त कंगाल है!

जिन्दगी ये मेरी गम का जंजाल है......



नाम ही है सुना मैनें देखी नहीं!

शक्ल से तो कभी क्या बला है खुशी!

है… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on January 6, 2015 at 10:30pm — 11 Comments

गजल - मेरा दिल है कि गम का कारखाना है!

१२२२ १२२२ १२२२

मेरा दिल है कि गम का कारखाना है!
जगह यह अब सनम का कारखाना है!!

वे आँखे जुल्फ़,पलकें, रंग,लब,भौंहे!
वो चहरा है कि बम का कारखाना है!!

नहीं है सच यहाँ कुछ भी जो दिखता है!
ये दुनिया बस वहम का कारखाना है!!

गई है माँ तु जिस दिन से खुदा के घर!
ये घर तब से सितम का कारखाना है!!

कि इंसां तो ख़ताओं का है इक पुतला!
खुदा 'राहुल' रहम का कारखाना है!!

मौलिक व अप्रकाशित!

Added by Rahul Dangi Panchal on January 3, 2015 at 11:00am — 21 Comments

गजल- वरना मेरा इबादत से रिश्ता नहीं!

212 212 212 212



मैं तो मरता हुँ पर प्यार मरता नहीं!

इश्क का भूत मन से निकलता नहीं!!



हाल क्या हो गया देख रो रो मेरा!

सबको दिखता है पर तुझको दिखता नहीं!!



किस गली किस शहर में कहाँ पे है तू!

दिल मेरा मुझसे अब ओर थमता नहीं!!



हो जो बस में मेरे तो मैं नफरत करूं!

क्या करूं आपसे प्यार घटता नहीं!!



लोग कहते है मौसम सुहाना है अब!

सबको लगता है पर मुझको लगता नहीं!!



साँस आती नहीं उसको देखें बिना!

उसको देखें बिना… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on January 1, 2015 at 9:56pm — 12 Comments

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