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गजल- आन बान शान पर तो मर मिटो या मार दों!

२१२१ २१२१ २१२१ २१२

भारती की मूरती को आज फिर संवार दों!
आर्यवर्त की रिदा को दूध सा निखार दों!!

जिन्दगी ये देश की है देश पर निसार दों!
जितनी बार भी मिले कि उतनी बार वार दों!!

गाडते चलो अमर तिरंगे को सितारो तक!
मानचित्र हिन्द का ब्रह्माण्ड पे उभार दों!!

जो सिमट गये वतन की राह में वे कह गये!
आन बान शान पर तो मर मिटो या मार दों!!

लोग जो अभी तलक जगे नहीं जगा दो अब!
देश की गली गली में जाके तुम पुकार दों!!

पाश्च सभ्यता का जो फितूर चढ गया तुम्हें!
तुम दिमाग में से उस फितूर को उतार दों!!

राष्ट्र की अखण्डता पे आँच लाने वालो को!
लात मार मार के कि फेंक सीमा पार दों!!

ऐ जवान खून आज थाम ले कमान को!
देश डगमगा रहा है दोस्तों उभार दों!!

मौलिक व अप्रकाशित!

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 3, 2015 at 7:08pm

देशभक्ति से औत प्रोत बहुत बढ़िया प्रस्तुति है जिसके लिए आप बधाई के हक़दार हैं |भाव बहुत खूबसूरत हैं शिल्प भी  कुछ सुधार के पश्चात् जिसपर आ० गणेश जी ने इशारा भी किया है इसके आलावा अंतिम दो शेरो में तकाबुले रदीफ़ दोष भी बन रहा है इन सुधारों के बाद बहुत निखार आएगा ...आप इसमें भी सफल होंगे मेरी शुभकामनायें. 

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 26, 2015 at 8:19am
आदरणीय शिज्जु "शकूर" जी शुक्रिया! मैं पुरी कोशिश करूंगा

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 26, 2015 at 8:11am

आदरणीय राहुल जी शिल्प पर आपका सुधार सराहनीय है इस रचना में यह साफ दिखाई दे रहा है। शेष आदरणीय गणेश जी ने कह ही दिया है।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 25, 2015 at 10:35pm
आदरणीय gumnaam pithoragarhi जी बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by gumnaam pithoragarhi on January 25, 2015 at 10:32pm

बहुत बहुत बधाई इस सार्थक रचना पर , आदरणीय राहुल जी, सादर।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 25, 2015 at 7:05pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी शुक्रिया

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 25, 2015 at 6:57pm

आदरनीय राहुल भाई , देश भक्ति से ओत प्रोत आपकी ये गज़ल  बहुत सुन्दर  हुई है ! आपको हार्दिक बधाई । 

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 25, 2015 at 1:49pm
शुक्रिया आदरणीय

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 25, 2015 at 1:45pm

माफ़ी और क्षमा जैसी कोई बात नहीं मित्र, पूर्व की बात पुनः दुहराता हूँ, "हम सभी साथ साथ हैं" 

:-)

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 25, 2015 at 1:34pm
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी मैं माफी चाहता हुँ! क्षमा!

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