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Ram Awadh VIshwakarma
  • Male
  • Gwalior Madhyapradesh
  • India
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Naveen Mani Tripathi commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आ0 सर लाजवाब प्रस्तुति हेतु बधाई "
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"कुछ उड़ानों की तमन्ना को लिये था जिन्दा बहुत खूबसूरत शेर है बहु बहुत बधाई"
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-जिस्म है मिट्टी इसे पतवार कैसे मैं करूँ
"आदरणीय नीलेश जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"इदरणीय मनन कुमार जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये हार्दिक बधाई।"
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"आदर्णीय नीलेश जी आपके कहने की शैली सबसे अलग होने के कारण ही सभी शेर पाठक को प्रभावित करते हैं हर शेर खूबसूरत है। बधाई।"
Apr 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई। कृपया शर्मा को शरमा कर ले। सादर"
Apr 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Harash Mahajan's blog post ज़ुदा हुआ पर सज़ा नहीं है
"आदरणीय हर्ष महाजन जी ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है।ये इश्क है क्या पता नहीं है ऐसा कर सकते हैं ऊला मिसरा पर भी काम करने की आवश्यकता है।"
Apr 8
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसन्द आई एवं उत्साह वर्धन किया पुन: धन्यवाद।"
Apr 8
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आदर्णीय  श्यामनारायण वर्मा जी गज़ल पसन्दगी केलिये सादर आभार"
Apr 8
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आदरणीय हर्ष महाजन जी बहुत बहुत शुक्रिया ग़ज़ल पसन्द करने एवं उत्साह वर्धन के लिये।"
Apr 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"वाह बढ़िया सरस ग़ज़ल कही है आदरणीय..सादर"
Apr 8
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आदर्णीय नीलेश जी ऐसा कभी कभी हो जाता है। मुझसे भी होता है। मुझसे बह्र में भी गल्ती हो जाती है और ओपेन बुक्स आन लाइन में विद्वान सदस्य त्रुटि दूर कर देते हैं। आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।"
Apr 7
Shyam Narain Verma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"वाह ! बहुत खूब | सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई"
Apr 7
Harash Mahajan commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"वाह !! आदरणीय राम अवध जी, अच्छी गजल के लिए बहुत बहुत हार्दिक बधाई ।"
Apr 7
Nilesh Shevgaonkar commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आ. राम अवध जी,आप की तक्तीअ बिलकुल ठीक  है ..मिसरा भी बहर में है..मेरे समझने में कोई भूल हुई इ..मैं क्षमा सहित अपना कमेंट वापस लेता हूँ..सादर "
Apr 7
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आदर्णीया नीलम उपाध्याय जी ग़ज़ल पसन्दगी के लिये सादर आभार।"
Apr 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Gwalior Madhya pradesh
Native Place
Basti U.P.
Profession
Retired Govt. Servent
About me
Retired as Divisional Engineer BSNL book published 1.Mehman Bhi Ltkate Hain ( Gazals) 2.Chakoo khatkedar hai ab (Gazals) 3.Muft khori Jinda Bad ( Gadya Vyangya ) 4. Vishwakarma Brahmin aur unke gotra 5.Iski Topi Uske Sar Pe (Gazals).

Ram Awadh VIshwakarma's Blog

ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद

बह्र- फाइलातुन मफाइलुन फैलुन

2122 1212 22

मार कर पेट में कटारी खुद।

मर गया एक दिन मदारी खुद।

अपने कर्मों से वो जुआरी खुद।

हो न जाये कभी भिखारी खुद।

पड़ गये दाँव पेंच सब उल्टे,

फँस गया जाल में शिकारी खुद।

आगये दिन हुजूर अब अच्छे

दान देने लगे भिखारी खुद।

हैं नशामुक्ति के अलम्बरदार,

पर चलाते हैं वो कलारी खुद।

खानदानी हुनर है बच्चों में,

सीख लेते हैं दस्तकारी…

Continue

Posted on April 6, 2018 at 5:39am — 17 Comments

ग़ज़ल- बुढ़ापा आ गया लेकिन समझदारी नहीं आई

बह्र - मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन

बुढ़ापा आ गया लेकिन समझदारी नहीं आई।

रहे बुद्धू के बुद्धू और हुशियारी नहीं आई।

किया ऐलान देने की मदद सरकार ने लेकिन

हमेशा की तरह इमदाद सरकारी नहीं आई।

पड़ोसी के जले घर खूब धू धू कर मगर

साहब,

खुदा का शुक्र मेरे घर मे चिंगारी नहीं आई।

ढिंढोरा देश भक्ति का भले ही हम नहीं पीटें,

मगर सच है लहू में अपने गद्दारी नहीं आई।

बहुत से लोग निन्दा रोग से बीमार हैं…

Continue

Posted on February 26, 2018 at 6:34pm — 7 Comments

ग़ज़ल - अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

बह्र- मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन

संगत खराब थी तभी गुन्डा निकल गया।

अब क्या बतायें हाथ से बेटा निकल गया।

घर से निकल गया मेरे इक दिन किरायेदार,

अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

जिसको खरा समझ के खरीदा था हाट से,

किस्मत खराब थी मेरी खोटा निकल गय।

देखो तो धूल झोंक अदालत की आँख में,

होकर बरी वो ठाठ से झूठा निकल गया।

हिन्दू का घर हो या कि मुसलमान का हो घर,

घर घर अलख जगाता कबीरा निकल…

Continue

Posted on February 14, 2018 at 4:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल- मेरा घर भी कितना हवादार है।

बह्र - फऊलुन फऊलुन फऊलुन फउल

न छत है न कोई भी दीवार है।

मेरा घर भी कितना हवादार है।

हुनरमन्द होकर भी बेकार है।

अजीबोगरीब उसका किरदार है।

जिसे दूर तक सूझता ही नहीं,

वही इस कबीले का सरदार है।

भले ही जुदा धड़ से सर होगया,

अभी भी मेरे सर पे दश्तार है।

वो शेखी पे शेखी बघारे तो क्या,

सभी जानते हैं वो मुरदार है।

दवा का असर कोई होगा नहीं,

वो…

Continue

Posted on January 29, 2018 at 9:49pm — 13 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 9:43pm on July 30, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Mushayra :- कमेन्ट जीस पोस्ट पर करनी हो ठीक उसके नीचे दाहिने तरफ ब्लू रंग में Reply लिखा हुआ है उसको क्लिक कर जब कमेन्ट करेंगे तो थ्रेड में आएगा, मुख्य बॉक्स में केवल नया पोस्ट करना चाहिए | ( आप नए है इसलिए जानकारी हेतु बता रहा हूँ ) 

इस कमेन्ट को पुनः बताये अनुसार लगा दे |

At 9:56am on July 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:53pm on July 3, 2011, Admin said…
At 7:18pm on July 2, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
 
 
 

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