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Er Anand Sagar Pandey
  • Male
  • Deoria,Uttar pradesh
  • India
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Er Anand Sagar Pandey's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Deoria, uttar pradesh
Native Place
Deoria
Profession
Engineer
About me
l am an engineer. Writing is my passion.l have been writing for last 12 Years.

Er Anand Sagar Pandey's Blog

कि जब तुम लौट कर आओगे::एक स्मृति

हौसला टूट चुका है, अब यकीन कहीं जख्मी बेजान मिलेगा,

कि जब तुम लौट कर आओगे तो सब वीरान मिलेगा ll



वो बरगद का पेड़ जहां दोनों छुपकर मिला करते थे,

वो बाग जहां सब फूल तेरी हंसी से खिला करते थे,

वो खिड़की जहां से छुपकर तुम मुझे अक्सर देखा करती थी,

वो गलियां जो हम दोनों की ऐसी शोख दिली पर मरती थीं,

वो बरगद,वो गलियां, वो बाग बियाबान मिलेगा,

कि जब तुम लौट कर आओगे……………l



खेत-खलिहान तक तुमको बंजर मिलेगा,

मेरी दुनिया का बर्बाद मंजर…

Continue

Posted on August 16, 2016 at 6:30pm — 3 Comments

** कविता::सियाचीन के शहीदों के नाम **

सौ बार जनम दे मां मुझको, सौ बार तुझी पर मरना है,

सौ बार ये तूफां आने दे, बाहों में इसको भरना है,

ख्वाब है मेरा मां तुझपर सौ बार लुटानी हैं सांसे,

सौ बार तेरी गोदी में सोकर फख्र खुदी पर करना है,

जमती अन्तिम सांस ने जब ये शेरों की मानिन्द कहा,

तब वीरों के इस जज्बे को हर दुश्मन ने जय हिंद कहा ll



जो तूफां की सरशैया पर हंसते-हंसते लेटा हो,

हंसकर उसकी मां बोली हर मां का ऐसा बेटा हो,

फख्र है मुझको जाते-जाते सियाचीन की गोद भर गया,

खाली मेरी गोद नहीं…

Continue

Posted on February 12, 2016 at 11:00am — 8 Comments

उसके आगे::गज़ल

क्या काफिया,रदीफ़ क्या,अशआर उसके आगे,

क्या शेर,क्या मक्ता,गज़ल बेकार उसके आगे l

क्या आसमान,जुगनू,क्या चांद,क्या सितारे,

मुमकिन भला है किसका दीदार उसके आगे l



क्या गुल,कि क्या गुलिस्तां,कि क्या भला शबनम,

पतझड़ लगी है मुझको बहार उसके आगे l



ये तो अच्छा है कि वो पर्दे में रहती है,

वरना चांद भी हो जाये शर्मशार उसके आगे l



जब भीनिगाहें शोख ले गुजरी वो गलियों से,

सारा मुहल्ला पड़ गया बीमार उसके आगे l



हम भी इसी हालात के…

Continue

Posted on August 10, 2015 at 11:00am — 18 Comments

सबसे खूबसूरत भूल (गज़ल)l

बाकी नहीं मंजर कोई आंखों में सिर्फ धूल है,
इस हाल में घर से निकलना बेसबब,फिज़ूल है,
मुझे दूर ही रख्खे तेरी चौखट से मेरी गैरतें,
मेरा भी इक ज़मीर है,मेरे भी कुछ उसूल हैं,
खैरात में मुझको नहीं तेरी वफायें चाहिये,
तू खुशी से दे तो तेरी नफरतें कुबूल हैं,
तुझे भूलकर भी भूलना मुमकिन नहीं है अब,
तू मेरी ज़िंदगी की सबसे हसीन भूल है ll
-Er Anand Sagar Pandey

मौलिक एवं अप्रकाशित l

Posted on July 20, 2015 at 8:44pm — 14 Comments

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At 9:13pm on July 20, 2015, Er Anand Sagar Pandey said…
तह-ए-दिल से शुक्रिया मिथिलेश जी l
At 9:25pm on July 19, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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