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Aparna Bhatnagar
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Ahmedabad Gujarat
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Jaipur
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A reader and have interest to write poetry and stories. I love to play table tennis.

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मिनौती





(हर नारी मिनौती है .. यहाँ दृश्य अरुणाचल का है , इसलिए बांस, धान , सूरज , सीतापुष्प , पहाड़ के बिम्ब भी उसी प्रदेश के हैं. बरई, न्यिओगा वहाँ के लोक जीवन से जुड़े गीत हैं - जैसे हम बन्ना- बन्नी , आला , बिरहा से जुड़े हैं ... इस संगीत को बांसों से जोड़ा है .. जैसे बांस के खोखल से निसृत होकर ये मिनौती की आत्मा में पैठ गए हैं ... नारी के मन और आत्म को समझाते हुए पुरुष से अंतिम प्रश्न पर कविता समाप्त होती है ...)

मेरे बांस



पहचानते… Continue

Posted on October 16, 2010 at 5:00pm — 6 Comments

सब भर जाएगा



सब भर जाएगा !





रॉबिन तुम एकदम रॉबिन चिड़िया जैसे हो



छल्लेदार बाल , अकसर लाल रहने वाली दो गोल बड़ी आँखें



कभी उंघते नहीं देखा तुम्हे



माँ को कभी उठाना नहीं पड़ता



मुर्गे की एक सरल बांग पर उमड़ जाती है सुबह



और तुम नंगे पैर ही दौड़ जाते हो सागर के अंचल पर



अंतहीन बढ़ते कदम



रेत पर छापती चलती हैं नन्ही इच्छाओं के पैर



तुम चलते कहाँ… Continue

Posted on October 7, 2010 at 7:00am — 4 Comments

गौतम की प्रतीक्षा ?

कुछ तितलियाँ



फूलों की तलहटी में तैरती



कपड़े की गुथी गुड़ियाँ



कपास की धुनी बर्फ



उड़ते बिनौले



और पीछे भागता बचपन



मिट्टी की सौंध में रमी लाल बीर बहूटियाँ



मेमनों के गले में झूलते हाथ



नदी की छार से बीन-बीन कर गीतों को उछालता सरल नेह



सूखे पत्तों की खड़-खड़ में



अचानक बसंत की लुका-छिपी



और फिर बसंत -सा ही बड़ा हो जाना -



तब दीखना… Continue

Posted on October 4, 2010 at 5:00pm — 10 Comments

माही बह रही थी

माही नदी के पानी पर ढाक के पेड़ों की सुनहरी काली छाया , चांदी का वरक लपेटे बहता प्रवाह और किनारे की बजरी पर उगी नरम घास अनारो के कबीलाई मन के संस्कार बन चुके थे. उसका बचपन यहीं रेत में लोट-लोटकर उजला हुआ था. घंटों नदी के पानी में पैर डालकर बैठी रहती.छोटे-छोटे हाथ अंजुरी में पानी समेटते और हवा में कुछ बूंदें यूँ ही उछल जातीं. अनारो उन्हें लपकने की कोशिश करती और जब एक-आध बूंद उसके श्याम मुख पर गिरती तो खनखनाकर ऐसे हंसती कि सारा वातावरण उसकी हंसी से… Continue

Posted on October 1, 2010 at 7:30am — 6 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 6:40pm on June 20, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
At 7:45pm on September 23, 2010, Julie said…


अपनी दोस्ती से नवाजने का बहुत बहुत शुक्रिया 'अपर्णा जी'...!! -जूली :-)
At 8:51pm on September 19, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…
स्वागतम्
=======
इस जगत में आए.. अच्छा किए
रहे अलम जगाए .. अच्छा किए । ..
At 2:19am on September 19, 2010, guddo dadi said…
अपर्णा बिटिया
सदा सुखी रहो
आपका निमंत्रण स्वीकार्य है
मेरा कोई ब्लॉग नहीं और ना ही लिखती हूँ
और मुझे हिंदी भी कम आती है
आशीर्वाद के साथ आपकी
गुड्डोदादी चिकागो अमेरिका से \
At 12:09am on September 19, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 8:28pm on September 18, 2010, आशीष यादव said…
thankyou for add me as your freind
At 6:57pm on September 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:14pm on September 17, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 5:04pm on September 17, 2010, Admin said…

 
 
 

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