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Anamika singh Ana
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Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय सुरेन्द्र  नाथ सिंह जी , प्रस्तुत  छंदों की सराहना हेतु हार्दिक आभार आपका , सादर "
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , हार्दिक आभार आपका ,सादर "
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी , प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आपका,  सादर"
Mar 28
Anamika singh Ana commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आना सावन में
" वाह , वाह ..बहुत सुंदर  छत पर चाँद निरखते बीतें, रोज अकेले रतियाँ. सखियाँ भी ससुराल गयीं सब, कौन करे मधु बतियाँ.   नैन थके हैं पंथ निहारत, सूने आँगन में..... विरही मन की वेदना व मिलन की गुहार लिए बहुत सुंदर गीत रचने हेतु हार्दिक…"
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी , प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आपका,  सादर"
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , प्रस्तुत छंदों की सराहना कर प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आपका,  सादर "
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय मो. आरिफ जी , प्रणाम !        प्रस्तुत रचना आपको पसंद आई ..लेखन सार्थक हुआ ..आपका अतिशय आभार , सादर !"
Mar 28
Anamika singh Ana commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीय समर कबीर जी , प्रणाम !          प्रस्तुत छंद की सराहना हेतु अतिशय आभार आपका ,सादर !"
Mar 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आद0 अनामिका जी सादर अभिवादन। बढिया छंद रचना की आपने, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर।"
Mar 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"हार्दिक बधाई."
Mar 25
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"जय माता की...वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर..भक्ति और वीर रस का सुन्दर समावेश..बधाई"
Mar 25
बसंत कुमार शर्मा commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"सुंदर भक्ति रचना, जय माँ शारदे "
Mar 23
Sheikh Shahzad Usmani commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"समय के अनुसार बहुत बढ़िया उम्दा सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीया अनामिका सिंह ''अना' जी।"
Mar 23
Anamika singh Ana posted blog posts
Mar 22
Mohammed Arif commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"आदरणीया अनामिका जी आदाब,                           शारदीय नवरात्र को लक्ष्य में रखकर बेहतरीन छंदों की रचना। सरलतम शब्दों का प्रयोग भी किया जा सकता था । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 22
Samar kabeer commented on Anamika singh Ana's blog post पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )
"मोहतरमा अनामिका सिंह 'अना' जी आदाब,बहुत अच्छे छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 22

Profile Information

Gender
Female
City State
U P
Native Place
Firozabad
Profession
Teaching
About me
As soon as I came to know tell everyone

Anamika singh Ana's Blog

पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )

निशुंभ शुम्भ मर्दिनी , जया त्रिकूट वासिनी |

शिवा प्रिया महातपा , सुधीर माँ सुहासिनी ||

विराट भाल दिव्य शक्ति मुंडमाल धारिणी |

कृपालु दृष्टि भाविनी नमामि लोक तारिणी ||

विशाल भाल चंद्रिका सुदीर्घ नेत्र शान हैं |

कृपालु मातु शीश केश यामिनी समान हैं ||

कपोल हैं भरे -भरे व होंठ लाल –लाल हैं |

विराट रूप देख मातु भक्त भी निहाल हैं ||

विशाल रक्तबीज अंत मातु तेग से किया |

विनाश चंड मुंड का प्रचंड वेग से किया…

Continue

Posted on March 21, 2018 at 11:00pm — 14 Comments

कुंडलिया छंद

 

 माना ताज  मिसाल  है , सुंदरता की  एक l

 चीख़ें गूँजीं हैं यहाँ , करुणा भरी अनेक ll

 करुणा भरी अनेक , यहाँ पर लिखीं कहानी l

 कटे   करों  से खून, बहा  है  बनकर  पानी ll

 'अना'  जान ले  सत्य, ताज  का हर दीवाना l

 प्रेम   निशानी  ताज, अजब है जग में माना ll

  - अनामिका सिंह  'अना'

    मौलिक व अप्रकाशित 

Posted on March 15, 2018 at 6:30pm — 11 Comments

कुंडलिया छंद

1-

वर दे  माता शारदे , रचूँ   प्रीति  के छंद l

हो समष्टि की साधना , बढ़े ह्रदय आनंद ll

बढ़े  ह्रदय आनंद , लेखनी  चलती  जाए l

लिखूँ सदा ही सत्य , झूठ से दिल घबराए ll

'अना' बहुत नादान,  शारदे जग की ज्ञाता l

सिर पर रख दे हाथ, आज तू वरदे माता ।।

2-

सत्कर्मों का फल मिला , पाया  मानव रूप l

जीवन पथ पर रख कदम ,देख न छाया धूप ll  

देख न छाया धूप , मैल   मत मन  में रखना l

करना सबसे प्रेम , स्वाद जीवन का चखना…

Continue

Posted on March 14, 2018 at 4:00pm — 15 Comments

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