For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anamika singh Ana's Blog (5)

गीत

बात बर्फ सी जमी हुई है, शब्दों में है लेकिन आग ।

देखो चमन न बँटने पाये, निकले हैं जहरीले नाग ।।

                                 

                             

बाढ़ आ गई आगजनी की,तोड़-फोड़ होती अविराम ।

भाईचारा है सूली पर, लोकतंत्र के चक्के जाम ।।

राष्ट्र संपदा की बलि देकर, दुश्मन खेल रहा है फाग ।

देखो चमन न बँटने पाये , निकले हैं जहरीले नाग ।।

                             

हिंसा भीड़ तमाशे का जो,…

Continue

Added by Anamika singh Ana on January 4, 2020 at 3:30pm — 5 Comments

गीत

सदानीरा बहे कल - कल , गगन पर चाँद तारे हैं ।

अलौकिक दृश्य वसुधा पर ,सुभग मनहर नजारे हैं ।।

उजालों ने चुगा शशि है , उषा आयी उगा रवि है ।

मही पर पुष्प शुचि कुसुमित,उड़े नभ पर विहग प्रमुदित ।।

झरे सित पुष्प शिउली के ,हवाओं ने बुहारे हैं ।

अलौकिक दृश्य वसुधा पर , सुभग मनहर नजारे हैं ।।

लली वृषभानु की राधा , ढके मुख घूँघटा आधा ।

चली पनघट लिये गागर ,खड़े हैं गैल नटनागर ।।

हुयीं लखि लाज से दुहरी , मदन करते इशारे…

Continue

Added by Anamika singh Ana on May 17, 2019 at 9:30pm — 6 Comments

पञ्चचामर छंद ( ज र ज र ज गा )

निशुंभ शुम्भ मर्दिनी , जया त्रिकूट वासिनी |

शिवा प्रिया महातपा , सुधीर माँ सुहासिनी ||

विराट भाल दिव्य शक्ति मुंडमाल धारिणी |

कृपालु दृष्टि भाविनी नमामि लोक तारिणी ||

विशाल भाल चंद्रिका सुदीर्घ नेत्र शान हैं |

कृपालु मातु शीश केश यामिनी समान हैं ||

कपोल हैं भरे -भरे व होंठ लाल –लाल हैं |

विराट रूप देख मातु भक्त भी निहाल हैं ||

विशाल रक्तबीज अंत मातु तेग से किया |

विनाश चंड मुंड का प्रचंड वेग से किया…

Continue

Added by Anamika singh Ana on March 21, 2018 at 11:00pm — 14 Comments

कुंडलिया छंद

 

 माना ताज  मिसाल  है , सुंदरता की  एक l

 चीख़ें गूँजीं हैं यहाँ , करुणा भरी अनेक ll

 करुणा भरी अनेक , यहाँ पर लिखीं कहानी l

 कटे   करों  से खून, बहा  है  बनकर  पानी ll

 'अना'  जान ले  सत्य, ताज  का हर दीवाना l

 प्रेम   निशानी  ताज, अजब है जग में माना ll

  - अनामिका सिंह  'अना'

    मौलिक व अप्रकाशित 

Added by Anamika singh Ana on March 15, 2018 at 6:30pm — 11 Comments

कुंडलिया छंद

1-

वर दे  माता शारदे , रचूँ   प्रीति  के छंद l

हो समष्टि की साधना , बढ़े ह्रदय आनंद ll

बढ़े  ह्रदय आनंद , लेखनी  चलती  जाए l

लिखूँ सदा ही सत्य , झूठ से दिल घबराए ll

'अना' बहुत नादान,  शारदे जग की ज्ञाता l

सिर पर रख दे हाथ, आज तू वरदे माता ।।

2-

सत्कर्मों का फल मिला , पाया  मानव रूप l

जीवन पथ पर रख कदम ,देख न छाया धूप ll  

देख न छाया धूप , मैल   मत मन  में रखना l

करना सबसे प्रेम , स्वाद जीवन का चखना…

Continue

Added by Anamika singh Ana on March 14, 2018 at 4:00pm — 15 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service