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रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Male
  • uttarakhand, dehradun
  • India
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रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Friends

  • बसंत कुमार शर्मा

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रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी, फिर कभी।अभी तो ज़ख्म ही ताज़ा बहुत हैं,वो यादों की ज़बानी, फिर कभी।अकेलेपन से दोस्ती कर ली है मैंने,तुम्हारी मेहरबानी, फिर कभी।मिरी जुनूँ की दीवानी न देखी तुमने,वहशतों का ये मंज़र, फिर कभी।लबों पर ठहरी है बात जो अब तलक, वही बे-ज़ुबानी, फिर कभी।ख़लाओं में जो ढूँढती है तुम्हें, हमारी हैरानी, फिर कभी।मशक़्क़त बहुत है संभलने में अब, ये सब परेशानी, फिर कभी।अभी सो गए हैं सभी ख़्वाब ही, नई इक कहानी, फिर…See More
9 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"प्रबन्धक महोदय वेबसाइट का SSL certificate की वैधता खत्म हो चुकी है, देखें जरा"
Aug 3, 2023
Chetan Prakash commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"रोहित डोबरियाल साहब,  काव्य रचना है तो काव्यानुशासन अनिवार्य है, बंधुवर  !"
Aug 6, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"Chetan prakash ji  मैं आपका कहना समझ रहा हूँ किंतु ये बस भावनाएं हैं जो लिखी है ....अन्यथा न लें"
Aug 5, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"Chetan prakash साहब भावनाएं विधा में ही लिखी जाएं ये जरूरी तो नही है"
Aug 5, 2021
Chetan Prakash commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"जी, आदाब, आदरणीय, आप बेहतर  समझते हैं, नज़्म  कहन में निरन्तरता  के होते  ही बोधगम्य होती है , शुभ  रात्रि  !"
Aug 5, 2021
Samar kabeer commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"//यूँ तो अपना  था वो कहने को" पहली पंक्ति से शुरू होकर तीसरी  पंक्ति  " उनके  दिल  में उतर कर देखा जो खुद  को// भाई चेतन जी, आप शायद ये कहना चाहते हैं कि या तो पहली पंक्ति यूँ होना चाहिये--'यूँ तो अपने थे…"
Aug 5, 2021
Chetan Prakash commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"मैंने पंक्तियां उद्धृत की हैं, जनाब, फिर समझने को क्या रह जाता है, सिवाय आपके विधा को समने के! "
Aug 5, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"Chetan prakash ji आप एक बार पंक्तियों को समझें, वैसे सुझाव के लिए शुक्रिया"
Aug 5, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"अमीरुद्दीन अमीर साहब शुक्रिया"
Aug 5, 2021
Chetan Prakash commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"आदाब, रोहित  डोबरियाल साहब,  कविता, और  वो  भी, मुक्त  छंद  में अभिव्यक्त  अन्तर सम्बन्धों  पर , चाहे  संक्षिप्त ही क्यों  न हो, सावधानी  चाहिए!  " यूँ तो अपना  था वो कहने…"
Aug 5, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"जनाब रोहित डोबरियाल 'मल्हार' जी आदाब, अच्छी रचना हुई बधाई स्वीकार करें। 'उनके दिल में उतर कर देखा जो ख़ुद को'  इस पंक्ति में टंकण त्रुटि हो गई है 'उतर' को 'उतार' कर लें।  सादर। "
Aug 4, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"ज़नाब Samar kabeer साहब जी, शुक्रिया"
Aug 3, 2021
Samar kabeer commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"जनाब रोहित जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।तो"
Aug 3, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

अहसास

यूँ तो अपना था वो कहने कोपर वो अपना हो ऐसा एहसास कहाँ, उनके दिल में उतर कर देखा जो ख़ुद को तो जाना उनके दिल में अपना ठौर कहाँ, ख़ुद तजुर्बा ये मैने है पाया इस दुनिया में वफ़ा का मोल कहाँ, झूठे वादों पर चलती है दुनिया सच का तो अब है मौन यहाँ,यूँ तो अपना था वो कहने को पर वो भी अपना हो ऐसा एहसास कहा,मौलिक/ अप्रकाशितरोहित डोबरियाल "मल्हार"See More
Aug 3, 2021
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on amita tiwari's blog post थाली खाली लघु -कथा
"अच्छी बात है आपके बेटे ने किसी के बारे में सोचा ....पर ये आपकी जिम्मेदारी है कि विवाद और वास्तविकता से भी उसे रूबरू करवाएं हमेशा कहि,सुनी ओर देखी जाने वाली बात सत्य नही होती और हैं शौक सबको आ जाता है बहकने के बाद।"
Dec 18, 2020

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Male
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Dehradun
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Kargi
Profession
sitarist
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Musician sitarist

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Blog

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,

लंबी है कहानी, फिर कभी।

मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,

वो धुंधली सी निशानी, फिर कभी।

अभी तो ज़ख्म ही ताज़ा बहुत हैं,

वो यादों की ज़बानी, फिर कभी।

अकेलेपन से दोस्ती कर ली है मैंने,

तुम्हारी मेहरबानी, फिर कभी।

मिरी जुनूँ की दीवानी न देखी तुमने,

वहशतों का ये मंज़र, फिर कभी।

लबों पर ठहरी है बात जो अब तलक, 

वही बे-ज़ुबानी, फिर कभी।

ख़लाओं में जो ढूँढती है तुम्हें, 

हमारी हैरानी, फिर…

Continue

Posted on May 29, 2026 at 12:45pm

अहसास

यूँ तो अपना था वो कहने को

पर वो अपना हो ऐसा एहसास कहाँ,

उनके दिल में उतर कर देखा जो ख़ुद को

तो जाना उनके दिल में अपना ठौर कहाँ,

ख़ुद तजुर्बा ये मैने है पाया

इस दुनिया में वफ़ा का मोल कहाँ,

झूठे वादों पर चलती है दुनिया

सच का तो अब है मौन यहाँ,

यूँ तो अपना था वो कहने को

पर वो भी अपना हो ऐसा एहसास…

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Posted on August 2, 2021 at 11:30pm — 12 Comments

दिया तले अंधेरा

रोशनी ही रोशनी है चारों तरफ तो क्या हुआ

दिया तले तो फिर भी अंधेरा ही हुआ,

खबर नहीं उनको मेरे इश्क़ की तो क्या हुआ

पर इश्क़ तो मुझे उनसे सच्चा ही हुआ,

है हर धड़कन पर उन्हीं का कब्जा तो क्या हुआ

अब दिल भी तो उन्हीं का ही हुआ,

उनको मेरी ग़ज़ल पसंद नहीं तो क्या हुआ

पर उनका हर लफ़्ज तो ग़ज़ल ही हुआ,

मुहब्बत में मिले जख़्म "मल्हार" तो क्या हुआ

उसकी यादें भी तो मरहम ही हुआ,

हम उन्हें हमसफ़र ना बना पाये तो क्या हुआ

उनकी यादों के साथ ये सफ़र ही तो… Continue

Posted on March 5, 2018 at 10:16pm — 2 Comments

तू प्यार है मेरा

तू प्यार है मेरा यार है मेरा, ये बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
सब कहते हैं "मल्हार" तेरे गीतों में ये कशिश कहाँ से आती है
मैं दिल में रो कर,चेहेरे से हँस कर ये बात टालते जाता हूँ
.
अहसासों के कागज़ पर अब मैं ख़ुद को लिखता रहता हूँ
उम्र भर के यादों में, मैं बस तुझको ही ढूंढता रहता हूँ
.
अजीब दास्ताँ मेरे इश्क़ की, तुझे खोने से डरता…
Continue

Posted on October 5, 2017 at 1:30pm — 5 Comments

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दास्तां

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