For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

  

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ छिहत्तरवाँ योजन है।

 .   

 

छंद का नाम  -  चौपाई छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ - 

21 फरवरी’ 26 दिन शनिवार से

22 फरवरी 26 दिन रविवार तक

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.  

चौपाई छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.

***************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 


फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -

21 फरवरी’ 26 दिन शनिवार से 22 फरवरी 26 दिन रविवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं। 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करें.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें. 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. 
  8. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  9. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम 

Views: 609

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

चौपाई छंद

+++++++++

करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥

कटे फटे सब को सीता है। सदा अभावों में जीता है॥

 

काम नकद का नहीं उधारी। कारण यही काम है जारी॥

बहस नहीं करते नर नारी। धंधे में रखता ना यारी॥

 

आस नहीं मैं करता जिनसे। इज्जत ज्यादा मिलती उनसे॥

जब भी यहाँ विदेशी आते। बिन मांगे ज्यादा दे जाते॥

 

बंद दुकान बना है डेरा। बाकी समय लगाता फेरा॥

जब दुकान के मालिक आते। डेरा डंडा सब उठ जाते॥

 

गुमटी शासन से मिल जाए। जीवन में खुशियाँ भर आए॥

काम चलेगा बारह मासी। ना अभाव न होगी उदासी॥

 

+++++++++++++++++++++

मौलिक अप्रकाशित

 

   आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर आपने सुन्दर चौपाइयाँ रची हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. 

बंद दुकान बना है डेरा। बाकी समय लगाता फेरा॥......यह एक कटु सच्चाई है. कई दूकान वाले जो किसी की बड़ी दूकान के सामने अपनी छोटी सी दूकान लगाते हैं वे इस समस्या को भलीभाँति जानते हैं. कई बार जब मुख्य बाजार बन्द होता है तब वहां एक साप्ताहिक बाज़ार लग जाता है. फिर भी अपने देशी कारीगर को अपने छंदों में बहुत स्थान दिया है जबकि विदेशी को एक चरण में समेट अन्याय किया है... हा हा हा ... सादर 

आदरणीय अशोक भाईजी 

आपका कहन सही है। इतनी सुंदर  गोरी चिट्टी  कन्या पर ध्यान ही नहीं दिया इसलिए उस पर मेरी कलम नहीं चली। मोची को विशेष महत्व दिया , यह सचमुच उस सुंदरी पर अन्याय है। इस अपराध के लिए क्षमा चाहते हुए कुछ पंक्तियाँ  लिखकर संशोधित छंद पुनः पोस्ट करता हूँ।

बस मुझे कुछ समय दीजिए।

हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र पर सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई।

हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी

आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के लिए हार्दिक बधाई. 

शुभ-शुभ

शुभ प्रभात,  आदरणीय!

चौपाई छंद:

 भेदभाव सच सदा न होता

 वर्ग- भेद कभी सच न होता

 मोची  अपना  कर्म करेगा

 सन्यासिन जन भेद करेगा

 

 माँग हमेशा जननी होती

 आपूर्ति जरूरत की होती

 मनुज भाव बराबरी  होती

 कर्म अनुरूप परिणति होती

 

 कर्म प्रथम धर्म मनुज माना

 वही  पूजा  भगवान  माना 

 चर्मकार ईश अवतार हुआ 

 श्री कृष्ण ने जताया माना

 

 व्यवसाय ही स्वधर्म हुआ है

 वहाँ  ब्रह्म  का दर्श  हुआ है

 भक्ति भाव ही कर्म हुआ है

 यही ईश  का कथन हुआ है

 मौलिक व अप्रकाशित 

 21-02-2026

आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद 

परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण के बावजूद पद्य के मानको पर निबद्ध नहीं है. तुकान्तता पर काम करने की आवश्यकता है. 

विश्वास है, आप इस बिन्दु पर सार्थक काम कर पाएँगे. 

शुभातिशुभ

चौपाई

*

बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।  

रूप  मनोहर   सुन्दर  छोरी।। मोची   ढिग  आ  बैठी  गोरी।।

 

हरदिन सुबह न  कोई आता।। मोची कोई काम न पाता।।

किन्तु आज दिन ऐसा आया।। मोची ने भी अवसर पाया।।

 

सुबह-सुबह है चप्पल टूटी।। गोरी  की  है  किस्मत फूटी।।

बैठी वह चप्पल सिलवाने।। आयी  मुश्किल  दूर  भगाने।।

 

रूप चन्द्र ज्यों  पूरनमासी।। किन्तु नहीं यह भारतवासी।।

किसी संत की लगती चेरी।। बात सत्य यदि  मानों मेरी।।

 

अधरों अति सुन्दर स्मित फैली।। साथ लिए बैठी इक थैली।।

एक   पाँव   है   चप्पल    धारी।। दूजे  सहती  ठण्डक  भारी।।

 

सोच  रही   झटपट  मैं   जाऊँ।। मन्दिर जा ईश्वर को ध्याऊँ।।

दिन चढ़ आता है यह सिर पर।। भली  करें  अब सारी  ईश्वर।।

#

~ मौलिक/अप्रकाशित.

 

आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र को साकार करती बहुत सुंदर चौपाइयाँ हुई हैं। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।

आदरणीय अशोक भाईजी

आदरणीय अशोक भाईजी 

चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है। हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर्।

रूप चन्द्र ज्यों  पूरनमासी।। किन्तु नहीं यह भारतवासी।।

किसी संत की लगती चेरी।। बात सत्य यदि  मानों मेरी।। ..... वाह सुंदरता का सुंदर बखान  ।

इससे प्रभावित होकर मैंने भी कुछ पंक्तियाँ लिखी है।

पुनः बधाई\

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
3 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service