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Chetan Prakash's Discussions (722)

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"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न होता  मो…"

Chetan Prakash replied Feb 21 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

24 Feb 23
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"  सरसी छंद  : मकर संक्रांति  अनूठे     संस्कार     हमारे, जुड़े   हुए   त्यौहार  ।…"

Chetan Prakash replied Jan 25 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

27 Jan 25
Reply by pratibha pande

"  सरसी छंद  : हार हताशा छुपा रहे हैं, मोर   मचाते  शोर । व्यर्थ पीटते हैं छाती वो,…"

Chetan Prakash replied Dec 20, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 174

25 Dec 21, 2025
Reply by Saurabh Pandey

"सरसी छंद  रीति शीत की जारी भैया, पड़ रही गज़ब ठंड । पहलवान भी मज़बूरी में, पेल   रह…"

Chetan Prakash replied Nov 22, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 173

11 Nov 24, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

" प्रात: वंदन,  आदरणीय  !"

Chetan Prakash replied Oct 18, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 172

42 Oct 19, 2025
Reply by Saurabh Pandey

"सरसी छंद : रौनक  लौट बाजार आयी, जी   एस   टी  भरमार । वस्तुएं   अभूतपूर्व    सस्ती…"

Chetan Prakash replied Oct 18, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 172

42 Oct 19, 2025
Reply by Saurabh Pandey

"  कह मुकरियां :       (1) क्या बढ़िया सुकून मिलता था शायद  वो  मिजाज छनता था लेकिन…"

Chetan Prakash replied Sep 20, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 171

50 Sep 22, 2025
Reply by Saurabh Pandey

"भारती का लाड़ला है वो भारत रखवाला है ! उत्तुंग हिमालय सा ऊँचा,  उड़ता ध्वज तिरंगा …"

Chetan Prakash replied Aug 16, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 170

8 Aug 17, 2025
Reply by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

"रिमझिम-रिमझिम बारिशें, मधुर हुई सौगात।  टप - टप  बूंदें  आ  गिरी,  बादलों से प्रभात…"

Chetan Prakash replied Jul 19, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 169

21 Jul 20, 2025
Reply by Ashok Kumar Raktale

"तैल चित्र सम्मुख बालक रहा प्रेरणा बनना, है उसको पढ़कर, पिता समान बाबू । स्कूल जाते ब…"

Chetan Prakash replied Mar 22, 2025 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 165

23 Mar 23, 2025
Reply by pratibha pande

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चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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