For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

ओपन बुक्स ऑनलाइन के सभी सदस्यों को प्रणाम, बहुत दिनों से मेरे मन मे एक विचार आ रहा था कि एक ऐसा फोरम भी होना चाहिये जिसमे हम लोग अपने सदस्यों की ख़ुशी और गम को नजदीक से महसूस कर सके, इसी बात को ध्यान मे रखकर यह फोरम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमे सदस्य गण एक दूसरे के सुख और दुःख की बातो को यहाँ लिख सकते है और एक दूसरे के सुख दुःख मे शामिल हो सकते है |

धन्यवाद सहित
आप सब का अपना
ADMIN
OBO

Views: 71999

Reply to This

Replies to This Discussion

सादर नमस्कार आदरणीय मंच। आँग्ल कैलेंडर के नववर्ष की हार्दिक मुबारकबाद और शुभकामनाएं इप सभी गुरुजन का मार्गदर्शन और आशीर्वाद मंच को.सदैव सदाबहार मिलता रहे। आमीन।

सादर नमस्कार ।नये साल के आगमन की हार्दिक मुबारकबाद और शुभकामनाएं । 

कल का दिन मेरे और मेरे परिवारजनों के लिए एक सुखद संयोग लेकर आया. 

 

मैं अपने ऑफिस में था. कुछ कर्मचारियों को लेकर मैंने एक मीटिंग आहूत की थी और वही चल रही थी. लगभग चार बजे मेरा मोबाइल झनझनाया. मोबाइल पर ओबीओ के प्रबन्धन की सदस्य, विदूषी आदरणीया प्राचीजी का नाम झलका. कॉल रिसीव करते ही आवाज आयी, ’भाईसाहब, नमस्ते.. मैं भोपाल में हूँ.’ सुनते ही मैं चौंका, ’अरे.. आप कब आयीं? कैसे ? अभी कहाँ हैं आप? ..

कि, कॉल डिस्कनेक्ट हो गया. अर्थात, उस समय वे जिस स्थान पर थीं, वहाँ कनेक्टिविटी को लेकर समस्या थी. परन्तु, असफल ही सही, एक-दो कॉल और कुछेक मैसेज के चलते जो कुछ स्पष्ट हुआ, वह यह, कि आ० प्राचीजी भोपाल शहर स्थित सुप्रसिद्ध ही नहीं, ऐतिहासिक इंजिनियरिंग कॉलेज, मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलोजी (MANIT), में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के विज्ञान-जगत के विद्वानों के समागम (इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल) में ससम्मान निमंत्रित थीं. वे कल ही प्रातः भोपाल आयी थीं. साथ ही, यह भी, कि उनकी वापसी कल ही देर सायं 9.30 बजे की फ्लाइट से नियत थी. 

ऑफिस से मैं सीधा घर गया और अपने बेटे को लेकर कॉलेज परिसर पहुँच गया. उन्हें लेकर हमदोनों अपने घर करीब साढ़े छः बजे पहुँचे. मेरे किसी निवास-स्थान पर आ० प्राचीजी का यह प्रथम आगमन था.

 

आजकल मेरी बेटी, संसृति, भी अपने थर्ड इयर के फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा दे कर मेरे पास भोपाल में आयी हुई है. मेरी अनुजा का बेटा, श्वेतांक, भी आजकल मेरे पास ही, अर्थात अपने मामा के पास, आया हुआ है. आ० प्राचीजी मेरी बड़ी बेटी, सृष्टिसुधी, से हलद्वानी में आयोजित ओबीओ के कार्यक्रम के दौरान 2013 में मिल चुकी थीं. बताता चलूँ, कि हलद्वानी तथा, आगे, उत्तराखण्ड की हमारी वह यात्रा हमारे लिए चिरस्मरणीय है. फिर भी, उसकी चर्चा यहाँ आवश्यक नहीं. परन्तु, मेरे बेटे और मेरी छोटी बेटी ही नहीं, मेरी पत्नी, सुषमा, से भी आ० प्राचीजी पहली बार मिल रही थीं. बातचीत और नाश्ता-पानी करते हुए कब दो घण्टे व्यतीत हो गये, पता ही नहीं चला. पता चलना भी नहीं था.

सुषमा ने विदाई के समय भाभी के कर्तव्यों का यथासंभव निर्वहन करते हुए प्राचीजी का सस्नेह ’खोइंचा भरा’ और सभाव विदा किया. 

 

तत्क्षणॊं की कुछ पारदर्शियाँ आप सभी के लिए ... 

आ. भाई जी, इस शुभ मिलन की असीम हार्दिक बधाई। मन प्रफुल्लित हो गया। 

भाई बहन की ये मुलाक़ात मुबारक हो,मुझे भी ऐसा ही कुछ अनुभव हुआ था जब बहना राजेश कुमारी जी मेरे ग़रीब ख़ाने पर तशरीफ़ लाई थीं ।

सादर अभिवादन। सभी सदस्यों को मदनोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 

आ. भाई गिरिराज भण्डारी जी को जन्मदिन की असीम हार्दिक शुभकामनाएँ।

Joys and Sorrows, Open Books Online with Family! Sharing life's chapters with loved ones is like turning the pages of an open book, where every moment, both happy and sad, becomes a cherished story. In this digital age, the virtual world becomes our shared space, where we celebrate victories, console during challenges, and find solace in togetherness. Here, amidst the pixels and screens, our bonds strengthen, reminding us that distance can't diminish the warmth of family ties. Let's continue this beautiful journey, reading and writing the story of our lives together, embracing every emotion, and cherishing each chapter.

आ. भाई योगराज प्रभाकर जी को जन्मदिन की असीम हार्दिक शुभकामनाएँ।

हार्दिक आभार आ० लक्ष्मण धामी जी.

इस पटल के प्रधान सम्पादक आदरणीय योगराज प्रभाकर जी के जीवन तथा हम सभी ओबीओ जन के लिए विशिष्ट तिथि का सहर्ष स्वागत है। 

आदरणीय योगराज जी हम सब के बीच स्वस्थ, सुखी तथा सक्रिय बने रहें और हमारे साहित्यिक प्रयासों पर हमारा मार्गदर्शन करते रहें। 

शुभातिशुभ

आपके इन आशीर्वचनों के लिए हार्दिक आभार आ० सौरभ पाण्डेय जी. 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहावलीः सभी काम मिल-जुल अभी, होते मेरे गाँव । चाहे डालें हम वहाँ, छप्पर हित वो छाँव ।। बैठेंगे…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"दिये चित्र में लोग मिल, रचते पर्ण कुटीरपहुँचा लगता देख ये, किसी गाँव के तीर।१।*घास पूस की छत बना,…"
6 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"हाड़ कंपाने ठंड है, भीजे को बरसात। आओ भैया देख लें, छप्पर के हालात।। बदरा से फिर जा मिली, बैरन…"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से सम्मानित करने का दिल से आभार । सर यह एक भाव…"
16 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत बढ़िया दोहा लेखन किया है आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। बहुत बहुत…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । सुझाव के लिए हार्दिक आभार लेकिन…"
Wednesday
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"अच्छे दोहें हुए, आ. सुशील सरना साहब ! लेकिन तीसरे दोहे के द्वितीय चरण को, "सागर सूना…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion कामरूप छंद // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"सीखे गजल हम, गीत गाए, ओबिओ के साथ। जो भी कमाया, नाम माथे, ओबिओ का हाथ। जो भी सृजन में, भाव आए, ओबिओ…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion वीर छंद या आल्हा छंद in the group भारतीय छंद विधान
"आयोजन कब खुलने वाला, सोच सोच जो रहें अधीर। ढूंढ रहे हम ओबीओ के, कब आयेंगे सारे वीर। अपने तो छंदों…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion उल्लाला छन्द // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"तेरह तेरह भार से, बनता जो मकरंद है उसको ही कहते सखा, ये उल्लाला छंद है।"
Tuesday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service