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खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

ओपन बुक्स ऑनलाइन के सभी सदस्यों को प्रणाम, बहुत दिनों से मेरे मन मे एक विचार आ रहा था कि एक ऐसा फोरम भी होना चाहिये जिसमे हम लोग अपने सदस्यों की ख़ुशी और गम को नजदीक से महसूस कर सके, इसी बात को ध्यान मे रखकर यह फोरम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमे सदस्य गण एक दूसरे के सुख और दुःख की बातो को यहाँ लिख सकते है और एक दूसरे के सुख दुःख मे शामिल हो सकते है |

धन्यवाद सहित
आप सब का अपना
ADMIN
OBO

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आज हमारे परिवार के सक्रिय सदस्य एवम सबके चहेता आदरणीय अलीम आज़मी जी और आदरणीया ममता पाण्डेय जी का जन्म दिन है, हम सभी आप के लम्बी उम्र और सफल जीवन की कामना करते है, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाये स्वीकार करे,
janadin ki bahut bahut shubhkamnaye aleem jee aur mamata jee...

bhagwaan se yahi prarthana hai ki aap dono ko duniya ki saari khusiya mile aur aaplog ke jeewan me dukh naam ka koi chij hi naa ho.......

shubhkamna sahit.......PREETAM TIWARY


Admin said:
आज हमारे परिवार के सक्रिय सदस्य एवम सबके चहेता आदरणीय अलीम आज़मी जी और आदरणीया ममता पाण्डेय जी का जन्म दिन है, हम सभी आप के लम्बी उम्र और सफल जीवन की कामना करते है, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाये स्वीकार करे,
भाइयो मैं आज से 15 साल पहले हुई एक घटना का ज़िक्र करना चाहता हू, वो दिन था 15 जून 1995 जब मैं और सरोज जी प्यार के बंधन मे बँधे यानी आज के दिन ही हमारी शादी हुई थी,
धन्यवाद,
साथियो, आज हमारे प्रिय श्री गणेश जी "बागी" की शादी कि 15 वीं सालगिरह है ! इस शुभ अवसर पर मैं अपनी एवं समस्त oBo परिवार कि तरफ से उनको शुभकामनाएं देना चाहता हूँ ! मैं परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी जोड़ी युगों युगों तक बनी रहे, और भगवान आपको और आपके पूरे परिवार को हर ख़ुशी और हर सफलता बख्शे !
बहुत बहुत धन्यवाद योगराज भईया, बस आप का आशीर्वाद जीवन भर बना रहे यही कामना है,
बागी भैया आपको शादी की सालगिरह मुबारक हो.
यह हास्य कविता बागी जी को उनकी शादी की १५ वीं सालगिरह पर स्पेम समर्पित है ! जोकि श्री राणा प्रताप सिंह जी के सहयोग से लिखी है !

बहर घूमने खाने की, देखो अब आदत ख़तम हुई
अपने बागी जी की अब, हर एक बगावत ख़तम हुई

जब डेढ़ दशक पहले शादी की, पड़ी पांव में बेड़ियाँ
गप्प लड़ाएं मित्रों संग, इसकी भी चाहत ख़तम हुई

अपने भैया को हैं भाए, बेलन इतने भाभी के
हलुए, खीर और पूडी, खाने की हसरत ख़तम हुई

तड़के ही उठ कर अब इनको, दूध भी लाना पड़ता है
दिन चढ़ने तक सोने की, जो भी थी राहत ख़तम हुई

भूल गए चौराहा और, पप्पू की चाय भी भूल गए
और सिनेमा के टिकटों की, सारी कीमत ख़तम हुई

पत्नी जी जब सामने आये, ये मिमियाते फिरते हैं
कभी दहाड़े, धरती हिलती, अब वो ताकत ख़तम हुई
waah waah....bagi ji ki peeda ko shabd de diye rana ji aur yogi sir ne ....wah
21 tareekh se apka chhota bhai apne jeevan me nayi job ke saath nayi shuruaat karne ja raha hai, central india ke ek bade MBA entrance coaching institute Cerebral Heights ki monthly magazine 'EnriCH" ka sub editor ban ke join kar raha hu....sabhi ki duaon ki jarurat hai.....:)
दुष्यंत जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के तरफ से मैं परम पिता परमेश्वर से कामना करते है की आप नई जॉब के साथ सफलता की बुलंदियों पर पहुचे,

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