आदरणीय साथियो,
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प्रतीक्षा है विषय मुक्त सार्थक रचनाओं की।
दूसरा अंक -पत्र
'..... तो बी. ए. की परीक्षा आपने दोबारा क्यों पास की? ' इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष ने अंतिम सवाल किया।
'क्योंकि पहली बार मैं ग्रेस से पास हुआ था। ' चंदू ने जवाब दिया।
'मिस्टर चंदन, उसके पहले भी तो रियायत (ग्रेस) से आपने परीक्षाएँ पास की होंगी। आपलोगों का कट ऑफ तो हमेशा ही नीचे रखा जाता है। ' अध्यक्ष ने फिर सवाल कर दिया।
' जी। पर मैं हमेशा सामान्य कट ऑफ से ऊपर रहा हूँ। रिकॉर्ड आपके पास है ।'चंदन दास छूटते ही बोला।
'अच्छा! पर अभी तो उस वर्ग में शामिल होने की होड़ मची है।' बोर्ड -सदस्य एक साथ बोल पड़े।
'जी। औरों की वे जानें। रियायत पीढ़ियों से चली आ रही थी। मैंने ठुकरा दी। ' चंदन जोश में बोला।
"मौलिक एवं अप्रकाशित"
आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और प्रोत्साहक संदेशवाहक विचारोत्तेजक लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई। शीर्षक भी बढ़िया, उम्दा और आकर्षक।
समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही देखने को मिलता है। हार्दिक बधाई इस लघुकथा पर आदरणीय मनन जी ।
आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई आदरणीय उस्मानी जी
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