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सामान्य ज्ञान का प्रश्न---डॉo विजय शंकर

व्यवस्था का मान करें ,
उस से ज्यादा जो व्यवस्था में हैं ,
उनका सम्मान करें।
वे कौन हैं , कहाँ से आये हैं ,
पूछ कर न अपना
अपमान करें।
जो व्यवस्था में हैं ,
वे माननीय , आदरणीय हैं ,
पूज्यनीय , वन्दनीय हैं ,
ओजस्वी ,प्रकाशमान
देवतास्वरूप हैं ,
उनकें ज्ञान पर , उनकें
सामान्य ज्ञान पर प्रश्न न करें ,
वे स्वयं सामान्य ज्ञान का प्रश्न हैं,
बड़ी परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान
के प्रश्न पत्रों में पूछे जाते हैं ,
उन पर जो सही उत्तर दे दें ,
वे मेधावी ज्ञानी कहलाते हैं ,
परिक्षा में उच्च अंकों से पास हो जाते हैं ,
अच्छी सरकारी नौकरी पा जाते हैं ,
उसी व्यवस्था और उन्हीं व्यवस्थाकारों
के आगे सर नवाते हैं ,
उन्हीं का हुकुम बजाते हैं |

मौलिक एवं अप्रकाशित
डॉo विजय शंकर

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Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 1, 2015 at 9:02pm

आ० विजय सर !

आपके कटाक्ष पर मुग्ध हूँ  -

कौन हैं , कहाँ से आये हैं ,
पूछ कर न अपना
अपमान करें।
जो व्यवस्था में हैं ,
वे माननीय , आदरणीय हैं ,
पूज्यनीय , वन्दनीय हैं ,
ओजस्वी ,प्रकाशमान
देवतास्वरूप हैं ,
उनकें ज्ञान पर , उनकें
सामान्य ज्ञान पर प्रश्न न करें ,
वे स्वयं सामान्य ज्ञान का प्रश्न हैं,

Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2015 at 6:34pm

व्यंगात्मक ..प्रस्तुति के बधाई आदरणीय विजय शंकर सर...व्यवस्था के कठमुल्लेपन की अच्छी खबर ली आपने ,सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 1, 2015 at 3:48pm

सामान्य ज्ञान पर प्रश्न न करें ,
वे स्वयं सामान्य ज्ञान का प्रश्न हैं,   -- क्या बात है !  आदरणीय विजय भाई , सत्य वचन , बहुत सुन्दर !! रचना के लिये बधाइयाँ

Comment by Samar kabeer on May 1, 2015 at 3:31pm
आली जनाब डा.विजय शंकर जी,आदाब,बहुत ही अच्छी रचना है,एक एक शब्द दिल में उतरता चला गया,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं |

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