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मन की बात - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

दोहे

तोड़ो चुप्पी और फिर, कह दो मन की बात
व्याकुल तपती देह पर, हो सुख की बरसात।१।


लाज शरम चौपाल की, यू मत करो किलोल
जो भी मन की बात हो, अँखियों से दो बोल।२।


मन से मन की बातकर, कम कर लो हर पीर
बाँध  रखो  मत  गाँठ  में, दुख  देगा  गम्भीर।३।


मन से निकलेगी अगर, दुखिया मन की बात
जो भी  शोषक  जन  रहे, देगी  ढब  आधात।४।


कहना मन की बात नित, करके सोच विचार
जोड़े  यह  व्यवहार  को, तोड़े  यह  व्यवहार।५।


माँ से मन की बात  तब, रखी  छुपाकर खूब
अब कहने की लालसा, क्यों मन को महबूब।६।


मन में दबकर रह गयी, हरदम मन की बात
कहना चाहा  जब  कभी, बने  नहीं हालात।७।


कहते मन की  बात  वो, अपनी  ही हर बार
सुनते तो चलता पता, कितना दुख का भार।८।


मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 3, 2019 at 8:20pm

आ. भाई सलीम जी, प्रशंसा के लिए धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 3, 2019 at 8:19pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति से मान बढ़ाने के लिए आभार । आपकी सलाह बेहतरीन है । आभार।

Comment by SALIM RAZA REWA on December 3, 2019 at 6:46pm


भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत अच्छे दोहे लिखे आपने,मुबारकबाद।

Comment by Samar kabeer on December 1, 2019 at 12:14pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।

'तोड़ो चुप्पी और फिर, कहकर मन की बात
व्याकुल तपती देह पर, कर दो सुख बरसात'

इस दोहे को व्याकरण की दृष्टि से यूँ होना चाहिए:-

'तोड़ो चुप्पी और फिर,कह दो मन की बात

व्याकुल तपती देह पर,हो सुख की बरसात'

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2019 at 6:45am

आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2019 at 6:44am

आ. भाई सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। दोहों की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2019 at 6:42am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति से मान बढ़ाने के लिए आभार।

Comment by vijay nikore on December 1, 2019 at 1:50am

आपके लिखे दोहे बहुत अच्छे लगे। बधाई, मित्र लक्ष्मण जी।

Comment by नाथ सोनांचली on November 30, 2019 at 8:38pm

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहावली हुई है,, बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by TEJ VEER SINGH on November 30, 2019 at 7:35pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी। बेहतरीन दोहे।

कहते मन की  बात  वो, अपनी  ही हर बार
सुनते तो चलता पता, कितना दुख का भार।

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