For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

12122×4

अंधेरी घाटी में रोशनी का हसीन चश्मा जरूर होगा
हमें खबर तो नहीं है फिर भी तलब का रस्ता जरूर होगा

पुराने शब्दों की बारिशों में सकून अपना तलाश कर ले
जो उसके दिल में कहीं नहीं था वो खत में लिक्खा जरूर होगा

तेरे कदम यूं जमे हुए हैं, तुझे हिलाना सरल नहीं है
हमारी आहों से फिर भी इक दिन तेरा तमाशा जरूर होगा

चरागों का दम चुराने वाले क्या तुझको इतनी समझ नहीं है,

बुझेगी सूरज की जिंदगी जब, इन्हें जलाना जरूर होगा

पुकार मेरी न सुनने वाले तेरे सफर का चढ़ाव है अब
किसी ऊंचाई को छू के लेकिन तुझे उतरना जरूर होगा

करीब रहके भी तूने मेरी तड़प जरा भी सुनी नहीं है
किसी खबर पर तुझे यकीनन कभी तड़पना जरूर होगा

हमारे पहलू में रोशनी के ख्याल बेसुध पड़े हुए हैं
जमीं की खातिर फलक के दम पर हमें संभलना जरूर होगा

वफा के हकदार चंद मिसरे जो शेर बनने से रह गए हैं
जो इनको सानी समझ ले अपना कोई तो ऐसा जरूर होगा

गयी हुकूमत का कुछ सुना कर, नयी हुकुम मत से कुछ डराकर
यें सिर्फ हमको लड़ा रहे हैं हमें समझना जरूर होगा

सुखन के साये में जीने वाली,ओ जिंदगी की उदास शक्लों
यकीन रखो तुम्हारी खातिर नया सवेरा जरूर होगा

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 434

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 28, 2019 at 6:05pm

बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आदरणीय मनोज जी बधाई..

चौथे शे'र को अगर यूँ कहें

चराग़ हरदम बुझाने वाले क्या तुझको इतनी समझ नहीं है

मिटेगी या ढलेगी ,सूरज की ज़िन्दगी जब इन्हें जलाना जरूर होगा

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 25, 2019 at 10:03pm

किसी ऊंचाई 

यहां ऊंचाई को 122 पर नहीं ले सकते ।

इसे ऐसा कर सकते हैं

किसी बुलंदी को छू के 

121  22  121 22 121 22 121 22

ख्याल का बहुबचन ख्यालात होता है मेरे विचार से ख्याल एक बचन है ।

या फिर ऐसा कहें खयाल बेसुध पड़ा हुआ है ।

मतले में रब्त हासिल करने का प्रयास कर रहा हूँ

Comment by मनोज अहसास on September 25, 2019 at 4:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब

सादर

Comment by Samar kabeer on September 25, 2019 at 12:22pm

जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

'नयी हुकुम मत से कुछ डराकर'

इस पंक्ति में 'हुकुम मत' को "हुकूमत" कर लें ।

'यकीन रखो तुम्हारी खातिर नया सवेरा जरूर होगा'

इस मिसरे में 'रखो' को "रक्खो" कर लें,बह्र गड़बड़ हो रही है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
1 hour ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 शीर्षक — वापसी आज कोर्ट में सूरज और किरण के तलाक संबंधी केस का…"
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"भड़ास'मुझे हिंदी सिखा देंगे?फेसबुक की महिला मित्र ने विकल जी से गुजारिश की।'क्यों…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"वतन में जतन (लघुकथा) : अमेरिका वाले ख़ास रिश्तेदार अपने युवा बच्चों को स्वदेश घुमाने और…"
9 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service