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मेरा प्यारा गाँव:(दोहे )..............

मेरा प्यारा गाँव:(दोहे )..............

कहाँ गई पगडंडियाँ, कहाँ गए वो गाँव।
सूखे पीपल से नहीं, मिलती ठंडी छाँव।1।

सूखे पीपल से नहीं, मिलती ठंडी छाँव।
जंगल में कंक्रीट के , दफ़्न हो गए गाँव।2।

जंगल में कंक्रीट के , दफ़्न हो गए गाँव।
घर मिट्टी का ढूंढते, भटक रहे हैं पाँव।3।

घर मिट्टी का ढूंढते, भटक रहे हैं पाँव।
चैन मिले जिस छाँव में, कहाँ गई वो ठाँव।4।


चैन मिले जिस छाँव में, कहाँ गयी वो ठाँव।
मुझको लौटा दो वही, मेरा प्यारा गाँव।5।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशसित

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Comment by Sushil Sarna on August 8, 2019 at 7:52pm

आदरणीय  C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का दिल से आभार। 

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 6, 2019 at 7:10pm

 Sushil Sarna जी,
उत्तम दोहे | 

Comment by Sushil Sarna on August 5, 2019 at 7:32pm

आदरणीय  Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा से सृजन उपकृत हुआ , हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on August 5, 2019 at 7:31pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा से सृजन उपकृत हुआ , हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on August 5, 2019 at 7:30pm

आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा से सृजन उपकृत हुआ , हार्दिक आभार। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 5, 2019 at 11:46am

आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैंं हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on August 4, 2019 at 10:37am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत ख़ूब, अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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