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कैसे भूलें हम ....

कैसे भूलें हम ....

पागल दिल की बात को
सावन की बरसात को
मधुर मिलन की रात को
अधरों की सौगात को
बोलो
कैसे भूलें हम

अंतर्मन की प्यास को
आती जाती श्वास को
भावों के मधुमास को
उनसे मिलन की आस को
बोलो
कैसे भूलें हम

नैनों के संवाद को
धड़कन के अनुवाद को
बीते पलों की याद को
तिमिर मौन के नाद को
बोलो
कैसे भूलें हम

अंतस के तूफ़ान को
धड़कन की पहचान को
अधरों की मुस्कान को
तृषित प्रीत अरमान को
बोलो
कैसे भूलें हम

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 43

Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 8, 2019 at 7:51pm

आदरणीय  C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का दिल से आभार। 

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 6, 2019 at 8:18pm

 Sushil Sarna जी,
उत्तम रचना | 

Comment by Sushil Sarna on August 5, 2019 at 7:33pm

आदरणीय  Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा से सृजन उपकृत हुआ , हार्दिक आभार। 

Comment by Samar kabeer on August 4, 2019 at 10:50am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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