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एक क्षणिका :

कल
फिर एक कल होगा
भूख के साथ
छल होगा
आसमान होगा
फुटपाथ होगा
आस गर्भ में

बिलखता
कोई पल
विकल होगा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 91

Comment

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Comment by Sushil Sarna on January 6, 2019 at 1:46pm

आदरणीय PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA जी ... सृजन आपकी काव्यात्मक प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 6, 2019 at 1:45pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ... सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 6, 2019 at 1:44pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ... सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 3, 2019 at 1:37pm
आदरणीय
छलिया बैठा छल रहा जीवन के सब राग
भाग्य में है जो लिखा पाये उतना भाग
प्रदीप कुशवाह "आत्मानन्द"
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 2, 2019 at 3:18pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन क्षणिका रची आपने। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Samar kabeer on January 2, 2019 at 2:46pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिका हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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