For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

काँधे पर सभी शरीर गए (इस्लाह के लिए)

16 रुकनी ग़ज़ल

किस किस के नाम गिनाऊँ मैं, जो इस दिल मे भर पीर गए
जिस जिस को हिफाज़त सौंपी थी, वो सारे ही दिल चीर गए

वो तन्हा छोड़ गए लेकिन मैं उनको दोष नहीं दूँगा
जो तोहफे में इन दो प्यासे नयनों को दे कर नीर गए

हर गीत ग़ज़ल अशआर सभी हैं जिन लोगों की सौगातें
आबाद रहें वो, जो मुझ को, दे कर ग़म की जागीर गए

हर ख़ाब कुचल डाले मेरे, तुम रौंद गए अरमानों को
पर मुआफ़ किया मैंने तुमको, तुम चाहे कर तफ़्सीर गए

रातों की जिम्मेदारी इक लक्ष्मण को थी अब पंकज को
कम से कम मुझ नाची'ज़ को वो दे कर इतनी तौक़ीर गए

पैदल गाड़ी चाहे जिस भी साधन से आप चलें, लेकिन
अंतिम यात्रा में काँधों पर सबके निर्जीव शरीर गए

मौलिक अप्रकाशित 

Views: 993

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 29, 2018 at 9:23am

आदरणीय अजय तिवारी जी बहुत आभार, शिकस्ते-नारवा का ज्ञान मुझे बिल्कुल नहीं है। जहाँ तक 121 का सवाल है, इस पर पहले भी बहुत चर्चा हुई है, लेकिन मुझे लगता है, कि 22 वाली बहरों को आप सिर्फ 22 के संदर्भ में देखते हैं, दर असल उन्हें 2222 के संदर्भ में पूर्ण देखिए... कुछ शब्द जैसे....गीत-गान, शब्द-अर्थ, साथ-साथ इन पर भी गौर करें? 

Comment by Ajay Tiwari on August 29, 2018 at 7:12am

आदरणीय पंकज जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.

'रातों की जिम्मेदारी एक लखन को थी अब पंकज को'    इस पंक्ति में शिकस्ते-नारवा है. 

'दुनिया की अंतिम यात्रा में, काँधे पर सभी शरीर गए'    इस पंक्ति का दूसरा हिस्सा बह्र में नहीं है. यह मुतदारिक की ग़ज़ल है; इसमें फ़ऊलु (121) नहीं आ सकता. 'सभी' की जगह 'सारे' रखा जा सकता है या कुछ और सोचें.

सादर

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 28, 2018 at 7:46pm

आदरणीय बसन्त जी बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 28, 2018 at 7:46pm

आदरणीय तेजवीर सर बहुत बहुत आभार, यही शब्द प्रेरक हैं, जो आगे और लिखते रहने के लिए बल प्रदान करते हैं।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 28, 2018 at 7:45pm

आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम......आपकी इस्लाह, के सहारे ही मैं सीख पा रहा हूँ.....आप अपना स्नेह मुझ पर सदैव यूँ ही बनाये रखियेगा।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 28, 2018 at 5:39pm

वाह लाजबाब गजल 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 28, 2018 at 2:05pm

हार्दिक बधाई आदरणीय पंकज कुमार जी। बेहतरीन गज़ल।

पैदल गाड़ी चाहे जिस भी साधन से आप चलें, लेकिन
दुनिया की अंतिम यात्रा में, काँधे पर सभी शरीर गए

Comment by Samar kabeer on August 28, 2018 at 12:33pm

अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'जो तोहफे में इन दो प्यासे, नयनों को दे कर नीर गए'

इस पंक्ति में 'तोहफे' को "तुहफ़े" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service