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ऐ आसमान ....

क्या हो तुम
आज तक कोई नहीं
छू पाया तुम्हें
फिर भी तुम हो
ऐ आसमान

किसी बेघर की
छत हो
किसी का ख्वाब हो
किसी परिंदे का लक्ष्य हो
या
किसी रूह का
अंतिम धाम हो
क्या हो तुम
ऐ आसमान

नक्षत्रों का निवास हो
किसी चातक की प्यास हो
मेघों का क्रीड़ा स्थल हो
सूर्य का पथ हो
या
चाँद तारों का आवास हो
क्या हो तुम
ऐ आसमान

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 26, 2018 at 1:27pm

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' .जी. सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 25, 2018 at 8:50pm

वाह अच्छी कविता हुई आदरणीय

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:33pm

आदरणीय नरेन्द्रसिंह जी सृजन आपकी मधुर प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:33pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब। ... सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। आपको सपरिवार ईद मुबारक।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:32pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी प्रस्तुति आपकी मधुर प्रशंसा की आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:32pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब .... सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। आपको सपरिवार ईद मुबारक।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:32pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:31pm

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।

Comment by narendrasinh chauhan on August 23, 2018 at 7:03pm
सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई
Comment by Samar kabeer on August 23, 2018 at 2:55pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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