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इन्साफ का हिसाब लगाया करे कोई।
होता कहीं तलाक़ हलाला करे कोई।।

उनको तो अपने वोट से मतलब था दोस्तों ।
जिन्दा रखे कोई भी या मारा करे कोई।।

मजहब को नोच नोच के बाबा वो खा गया ।
बगुला भगत के भेष में धोका करे कोई ।।

लूटी गई हैं ख़ूब गरीबों की झोलियाँ ।
हम से न दूर और निवाला करे कोई ।।

सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।
यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।

आ जाइये हुजूर जरा अब ज़मीन पर ।
कब तक ज़मीं से चाँद निहारा करे कोई ।।

ख़ुशियाँ हज़ार लौट के आ जायेंगीं ज़रूर ।
थोड़ा सा बस्तियों में उजाला करे कोई ।।

मंदिर में सर झुकाएं या मस्ज़िद में सज़दा हो ।
लेकिन ख़ुदा को दिल में भी ढूढा करे कोई ।।

इतना भी मत सहो कि सितम दिलही तोड़ दे ।
तुमको यतीम जान सताया करे कोई ।।

इजहारे इश्क़ आप नही कीजिये जनाब ।
इस उम्र में न साथ गुजारा करे कोई ।।

वो मैकदे को पी के लियाकत दिखाएंगे ।
बस मुफ्त में ही जाम पिलाया करे कोई ।।

बूढा हुआ है बाप ज़रा शर्म तो करो ।
कब तक तुम्हारा बोझ उठाया करे कोई ।।

नवीन मणि त्रिपाठी मौलिक अप्रकाशित

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Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on July 19, 2018 at 4:31pm

वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है भाई जी बधाई .. .. . .

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 17, 2018 at 11:23pm

आ0 सुशील शरण जी हार्दिक आभार और शुक्रिया ।

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2018 at 5:52pm

वाह आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी वाह इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 17, 2018 at 10:01am

आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार और तहे दिल से शुक्रियः । मैंने रब्त बनाने का प्रयास किया था सम्भवतः कामयाब नहीं हो सका । 

सादर नमन ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 17, 2018 at 9:59am

आ0 बबिता गुप्ता जी हार्दिक आभार ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 17, 2018 at 9:57am

आ0 श्याम नारायण वर्मा जी हार्दिक आभार ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 17, 2018 at 9:56am

आ0 तेजवीर सिंह साहब बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by babitagupta on July 16, 2018 at 9:06pm

बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Samar kabeer on July 15, 2018 at 11:09am

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 14, 2018 at 12:15pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल।

सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।
यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।

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