For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मातृ दिवस पर दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'


घर को घर सा कर रखे, माँ का अनुपम नेह
बिन माँ  के  भुतहा लगे, चाहे  सज्जित गेह।१।


माँ ही जग का मूल  है, माँ  से ही हर चीज
माता ही धारण करे, सकल विश्व का बीज।२।


सुत के पथ में फूल रख, चुन लेती हर शूल
हर चंदन से बढ़ तभी, उसके पग की धूल।३।


शीतल सुखद बयार बन, माँ हरती सन्ताप
जिसको माँ का ध्यान हो, करे नहीं वो पाप।४।


रखे  कसौटी  पाँव  को, कंटक  बो  संसार
करे सरल  हर  राह माँ, आँचल उसे बुहार।५।


जायों को भर नींद दे, रातों को खुद जाग
माँ के जैसा है भला, किसमें यह अनुराग।६।


सुत को लगती  ठेस जब, माँ को  होती पीर
समझे सुत कैसे भला, सुख दुख आँखों नीर।७।


माँ का मन वो सिन्धु सा, हर दुख जहाँ समाय
लेकिन घन उठ नेह के, पलपल सुख बरसाय।८।


माँ वो पुस्तक  ईश  की, शब्द-शब्द में प्यार
जिसकी  सीखें  तारती, भवसागर  के पार।९।


सबको ममता दान दे, हरपल जिसका आब
माँ  वो  साहूकार  है,  रखती  नहीं  हिसाब।१०।


मौलिक/अप्रकाशित

Views: 68

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 17, 2018 at 10:42am

आ. भाई रमबली जी, सादर अभिवादन । उपस्थिति और उत्तम सुझाव के लिए आभार।

Comment by रामबली गुप्ता on May 17, 2018 at 8:51am

आदरणीय लक्षमण भाई जी सभी दोहे सुन्दर और सार्थक हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

प्रथम दोहे के प्रथम चरण को 'घर को घर जैसा रखे' करें तो कथ्य और बेहतर हो जाएगा।

तीसरे दोहे के तृतीय चरण को 'हरिचंदन सम श्रेष्ठ है' करके देखें कथ्य और सुंदर हो जाएगा।

चौथे दोहे के प्रथम पद को  'शीतल सुखद बयार माँ, हरती हर संताप।' इस प्रकार करने पर सुंदरता और बढ़ जाएगी।

शेष सब शुभ शुभ।सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 15, 2018 at 1:00pm

आ. भाई आरिफ जी, उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।

Comment by Mohammed Arif on May 15, 2018 at 11:01am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आदाब,

                              माँ की गरिमा-गौरव को रेखांकित करते बेहतरीन दोहे । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2018 at 5:53pm

आ. भाई आषुतोश जी, उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2018 at 5:51pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया से लेखन सफल हुआ । स्नेह व मार्गदर्शन के लिए आभार ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 14, 2018 at 4:30pm

आदरणीय भाई लक्ष्मण जी बहुत ही उम्दा दोहे हुए हैं ..माँ की सार्थकता और ममता को स्थापित करते शानदार दोहों के लिए हादिक बधाई सादर 

Comment by Samar kabeer on May 14, 2018 at 3:56pm

जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी आदाब,मातृ दिवस पर बहुत उम्दा और सार्थक दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे दोहे में 'चीज़' और 'बीज' की तुकान्तता सहीह नहीं है,देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"समय नहीं है अब ।"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"उपर अजय जी की ग़ज़ल पर मेरी टिप्पणी देखें।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ओबीओ लाइव तरही मुशायरा अंक-95 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"अजय जी, मत्ले के शेर को ही लें। आप क्या कहना चाह रहे हैं यह स्पष्ट नहीं है। शेर स्वयंपूर्ण…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"'ज़ह-ए-नसीब कि ज़र्रे को आफ़ताब कहा' सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आप तो स्वयं ही उस्ताद शायर हैं। कहने को कुछ नहीं सिवाय इसके कि मन आनंदित है।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब तिलक राज कपूर साहिब,मुशायरे में आपका स्वागत है,लेकिन:- 'बड़ी देर की मह्रबाँ आते…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"नीलेश भाई मैं तो अरसे बाद लौटा हॅूं, आपकी उपस्थिति देख कर आनंदित हूॅं। ग़ज़ल तो बहरहाल आपके कद के…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"इश्क़ में जान भी देने का ये वाद: देखोशम्अ के रक़्स में आशिक़ को उतरता देखो। पाक रिश्ते की महक दूर…"
5 hours ago
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरनीय समर जी, बहुत शुक्रिया "
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,मोहन जी,ऊपर के तीन अशआर में अलिफ़ की जगह 'या', क़वाफ़ी ले लिए…"
5 hours ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरणीय शिज्जु 'शकूर' जी, उम्दा पेशकश के लिए दिली मुबारकबाद कबूल करें"
5 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service