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सफेदपोश (लघुकथा)

लूट के माल का बंटवारा होना था । गिरोह के सभी सदस्य जुटे थे। अचानक पहरेदार ने आकर इत्तला किया, पुलिस ने घेरा डालना शुरू कर दिया है , जल्दी माल समेटो और भागो।
कौओं के बीच हंस बने व्यक्ति ने बुद्धिजीविता दिखाई "जरूर किसी ने गद्दारी की है। "
सरदार को बात जंच गई , हाँ गद्दार को छोड़ना मुनासिब न होगा। कमर से पिस्तौल निकाली और धांय।
"अरे सरदार ये तो अपना खास आदमी था।"
लाश के धवल वस्त्रों पर नजर मारते हुए सरदार गुर्राया " नहीं ! ये सफेदपोश हो गया था।"

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by babitagupta on May 16, 2018 at 9:12pm

आदरणीय सर जी, वर्तमान व्यवस्था पर शब्दों से अच्छा कटाक्ष किया है, बधाई स्वीकार कीजिए प्रस्तुत रचना के लिए ।

Comment by Nita Kasar on April 24, 2018 at 12:47pm

कथा उम्दा है थोड़ी फ़िल्मी हो गई ।हंस और कौन को प्रतीक बनाकर लिखी गई कथा के लिये बधाई आद०गौरव कुमार जी ।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 23, 2018 at 2:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीय कुमार गौरव जी।बेहतरीन लघुकथा।

Comment by Mohammed Arif on April 23, 2018 at 1:45pm

आदरणीय कुमार गौरव जी आदाब,

                              अच्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 23, 2018 at 10:37am

आदरणीय कुमार गौरव जी लघु कथा की प्रस्तुति पर बढ़ायी स्वीकार करें। 

Comment by Samar kabeer on April 22, 2018 at 6:38pm

आइडिया कहीं से भी आया हो,लेकिन जब पता चले कि पुलिस ने घेर लिया है तो कोई भी संवाद करेगा या ख़ुद को बचाने की फ़िक्र करेगा?

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 22, 2018 at 3:56pm

इस तरह के संवाद/दृश्य कुछ फ़िल्मों में भी पाये जाते हैं! शायद उनसे आइडिया मिला हो।

Comment by Samar kabeer on April 22, 2018 at 3:01pm

जनाब कुमार गौरव जी आदाब,लघुकथा काप्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'इत्तला किया' को " इत्तिला दी" कर लें ।

जब पहरेदार ने कहा कि पुलिस ने घेरा डालना शुरू कर दिया है,जल्दी माल समेटो और भागो-इसके बाद इतने वार्तालाप की क्या तुक है?

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 22, 2018 at 8:47am

बेहतरीन सृजन। यथार्थपूर्ण कटाक्षपूर्ण और विचारोत्तेजक। हार्दिक बधाई आदरणीय कुमार गौरव साहिब। वाह!

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