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वे मकां अक्सर हमें जर्जर मिले

2122 2122 212


आंधियों के बाद भी अक्सर मिले ।।
फिर किसी दरिया में हम बहकर मिले ।।

हौसले ने आसमाँ तब छू लिया ।
आप मुझ से जब कभी हंस कर मिले ।।

हक़ जो मांगा इस ज़माने से यहां ।
दोस्तों के हाथ में ख़ंजर मिले ।।

लूट की थीं दौलतें जिसमें लगीं ।
वो मकां अक्सर हमें जर्जर मिले ।।

क्या गले मिलते भी हम तुमसे सनम ।
प्यार के बदले बहुत पत्थर मिले ।।

ऐ खुदा इतनी दुआ कर दे अता ।
तू हमारी रूह के अंदर मिले ।।

खुद चले आना हमारी बज़्म में ।
वक्त जब भी आप को पल भर मिले ।।

और क्या दे जिंदगी के बाद वो ।
आप भी कब मुतमइन होकर मिले ।।


जीत लेंगे जंग उम्मीदों से हम।
क्या हुआ हालात जो बदतर मिले ।।

जब पता पूछा किसी से हुस्न का ।
घर बताते आपका रहबर मिले ।।

वह ग़ज़ल कहने लगी है इश्क़ में ।
अब तो उसकी शायरी को पर मिले ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Naveen Mani Tripathi on March 16, 2018 at 10:33pm

आ0 बृजेश कुमार जी सादर आभार 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 15, 2018 at 5:41pm

बढ़िया ग़ज़ल कही है आदरणीय त्रिपाठी जी..

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 14, 2018 at 11:04pm

आ0 हर्ष महाजन साहब सादर आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 14, 2018 at 11:03pm

आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ आभार । तुरन्त आडिट करता हूँ ।

Comment by Harash Mahajan on March 14, 2018 at 2:46pm

आदरणीय नवीन मनी त्रिपाठी जी एक अच्छी पेशकश के लिए बधाई स्वीकार करें । जैसा आ0 आरिफ जी ने कहा ऊनि तरफ ध्यान देंगे तो ग़ज़ल पढ़ने वालों को और भी मज़ा आएगा । बहुत बेहतरीन अश'आर सजाए हैं आपने अपनी इस ग़ज़ल में । दिली दाद कबूल कीजियेगा ।

सादर ।

Comment by Samar kabeer on March 14, 2018 at 2:41pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

2रे शैर के।ऊला में 'आसमा' को "आसमाँ" कर लें ।

'वक़्त  जब तुमको कोई शब भर मिले'

इस मिसरे को यूँ कर लें :-

'वक़्त जब भी आपको पल भर मिले'

10वें शैर में 'पूंछा' को "पूछा" करें,पहले भी कई बार बता चुका हूँ ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 14, 2018 at 11:55am
आ0 मु0 आरिफ साहब सप्रेम आभार ।
Comment by Mohammed Arif on March 14, 2018 at 8:51am

आदरणीय नवी मणि  त्रिपाठी जी आदाब,

                       बहुत भी उम्दा ग़ज़ल । अश'आरों से सुसज्जित । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं ।

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