For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सराबोर कर दे तेरे रंग से अब----होली विशेष

122 122 122 122

मुझे ढ़ाल दे अपने ही ढंग से अब
सराबोर कर खुद के ही रंग से अब

ज़रूरी है  ख़श्बू फ़िज़ाओं में बिखरे
बदन की तुम्हारे मेरे अंग से अब

न मुझसे चला जा रहा होश में है
तू मदहोश कर रूप की भंग से अब

है महफ़िल में भी मन हमारा अकेला
उमंगें इसे दे तेरे संग से अब

न जाने है कैसी जो मिटती नहीं है
मनस सींच तू प्रीत की गंग से अब

मौलिक अप्रकाशित

Views: 628

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 26, 2018 at 4:20pm

आदरणीय श्याम नारायण सर सादर आभार

Comment by Shyam Narain Verma on March 4, 2018 at 10:27am
बहूत खूब पसंद हार्दिक बधाई l सादर
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 4, 2018 at 9:04am

आदरणीय लक्ष्मण सर सादर आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2018 at 11:15pm

हार्दिक बधाई..

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 2, 2018 at 10:44pm

आदरणीय आरिफ सर, अवश्य

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 2, 2018 at 10:44pm

आदरणीय बाऊजी समर कबीर सर, आपका सुझाव उचित है, अभी सुधारता हूँ

Comment by Mohammed Arif on March 2, 2018 at 10:40pm

आदरणीय पंकज मिश्रा जी आदाब,

                      ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का तत्काल प्रभाव से संज्ञान लें ।

                                          रंग पर्व होली की शुभकामनाएँ ।

Comment by Samar kabeer on March 2, 2018 at 7:49pm

अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,होली पर अच्छी ग़ज़ल का तुहफ़ा दिया आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

मतले के ऊला मिसरे में दो बार 'अब' शब्द खटक रहा है,और दोनों मिसरों में 'तेरे' शब्द भी खटक रहा है,मुनासिब समझें ऊला मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'मुझे ढाल दे तू इसी ढंग से अब'

तीसरे शैर के सानी मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है, और जहाँ तक मेरी जानकारी है सही शब्द "भांग" है,देखियेगा ।

'अकेला बहुत है ये महफ़िल में भी मन'

इस मिसरे को यूँ कर लें तो साफ़ हो जायेगा:-

'है महफ़िल में भी मन हमारा अकेला'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
16 hours ago
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service