For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

झूठी कसम तो आपकी खाई न जाएगी

221 2121 1221 212

सच्ची  जो बात है  वो छुपाई न जाएगी ।

झूठी कसम तो आप की खाई न जाएगी ।।

बस हादसे ही हादसे मिलते रहे मुझे ।

लिक्खी खुदा की बात मिटाई न जाएगी ।।

चेहरे हैं बेनकाब यहाँ कातिलों के अब।

लेकिन सजाये मौत सुनाई न जाएगी ।।

ज़ाहिद खुदा की ओर मुखातिब न कर मुझे ।

काफ़िर हूँ मैं नमाज़ पढ़ाई न जाएगी ।।

कितने थे बेकरार तेरे इंतजार में ।

बरसात की वो रात भुलाई न जाएगी ।।

देखा है मैंने आपको जब से निगाह भर ।

ऐसी लगी है आग बुझाई न जाएगी ।।

मायूस मैकदे से यूँ लौटे तमाम रिन्द ।

शायद अभी शराब पिलाई न जयेगी ।।

गुजरेगी उम्र आपकी बस तिश्नगी के साथ ।

चिलमन जो आप से  ये हटाई न जाएगी ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी मौलिक अप्रकाशित

Views: 715

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 3, 2018 at 2:03pm

आ0 ब्रजेश कुमार भाई समर कबीर साहब ओबीओ के ही नही बल्कि ग़ज़ल के बादशाह हैं । उनकी इस्लाह बहुत कीमती है मेरे लिए । 

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 3, 2018 at 1:59pm

आ0 कबीर सर ओबीओ में उपस्थित देखकर अति प्रसन्नता हुई । ईश्वर आपको ऐसे ही स्वस्थ और प्रसन्न चित्त रखें । मैं ग़ज़ल को सुधरता हूँ । मेरा सादर नमन । विशेष आभार ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 2, 2018 at 8:50pm

आदरणीय त्रिपाठी जी...बहुत खूब ग़ज़ल कही..आदरणीय समर जी की टिप्पड़ी बड़ी ज्ञान वर्धक है..सादर

Comment by Samar kabeer on February 2, 2018 at 6:15pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'जो बात है सही वो छुपाई न जाएगी'

इस मिसरे में 'सही' शब्द के बारे में आपको कुछ बताना चाहूंगा,ये शब्द उर्दू में दो तरह से लिखा जाता है, एक तो 'सीन',छोटी 'ह्','ये',इसका अर्थ है "सीधा" और दूसरा 'सुवाद',बड़ी 'ह्','ये',और फिर बड़ी 'ह' इस तरह ये शब्द बना "सहीह",इसका अर्थ है "दुरुस्त",आपके मिसरे में जो शब्द लिया है वो 'सहीह'होना चाहिये, इस लिहाज़ से आप मतले का ऊला मिसरा यूँ कर सकते हैं :-

'सच्ची जो बात है वो छुपाई न जाएगी'

'काफ़िर हूँ मैं नमाज़ पढ़ाई न जाएगी'

इस मिसरे में 'नमाज़ पढ़ाई'शब्द ग़लत इसलिये है कि नमाज़ हर व्यक्ति नहीं पढ़ा सकता,उसके लिए इमाम होता है,यहाँ 'ननाज़ पढ़ी न जाएगी' का भाव है, इस मिसरे को आप ख़ुद बदलने का प्रयास करें ।

'देकग जो उसने आपको जबसे निगाह भर'

इस मिसरे में भाव स्पष्ट नहीं है,किसने देखा है?  इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं :-

'देखा है मैंने आपको जबसे निगाह भर'

'यूँ मैकदा से होके हैं लौटे तमाम रिन्द'

इस मिसरे ने भाव के साथ शिल्प भी कमज़ोर है ,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं :-

'मायूस मैकदे से यूँ लौटे तमाम रिन्द'

'चिल्मन तो अपने आप हटाई न जाएगी'

इस मिसरे में शिल्प के साथ व्याकरण दोष है,इसे यूँ कर सकते हैं :-

'चिल्मन ये आपसे जो हटाई न जाएगी'

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 2, 2018 at 5:45pm

आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Mohammed Arif on February 1, 2018 at 8:07am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                              शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

Comment by TEJ VEER SINGH on January 31, 2018 at 2:01pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल।

चेहरे हैं बेनकाब यहाँ कातिलों के अब।

लेकिन सजाये मौत सुनाई न जाएगी ।।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
9 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service