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ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज

1222 1222 1222 1222
गुलाबों से किताबों तक समाईं धूल की परतें
जरा देखो तो अब माथे पे आईं धूल की परतें!!

ये किस आगोश ने सारे शहर को घेर के रक्खा
घना है कोहरा या फिर हैं छाईं धूल की परतें?

गया इक वक़्त वो आया न तो सन्देश ही आया
हमीं ने रिश्ते नातों पर चढ़ाईं धूल की परतें

गिला इस बात का उनसे करें भी तो करें कैसे
गमे दिल ने मेरे लब पर सजाईं धूल की परतें

बड़े ही फख्र से छोड़ी थीं अपने गाँव की गलियां
मगर 'ब्रज' को यही गम है कमाईं धूल की परतें
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 25, 2018 at 8:55pm

आदरणीय विजय जी हार्दिक आभार...सादर

Comment by vijay nikore on January 25, 2018 at 1:07pm

अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई, बृजेश जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 24, 2018 at 8:19pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी...सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 24, 2018 at 3:34pm

आ. भाई बृजेश जी बढि़या गजल कही । बधाई स्‍वीकार करें । 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 23, 2018 at 9:26pm

शुक्रिया आदरणीय महेंद्र जी..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 23, 2018 at 9:25pm

आदरणीय तस्दीक जी..भारतीय फ़िल्म उधोग में 'कोहरा' नाम से दो फिल्में बन चुकी हैं एक 1964 की वहीदा रहमान की जिसका प्रसिद्ध गीत झूम झूम ढलती रात बेहद लोकप्रिय है दूसरी 1993 में अरमान कोहली और आयशा जुल्का को लेकर बनाई गई थी।मुझे लगता है कुहरा और कोहरा दोनों ही शब्द सही हैं...सादर

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 7:57pm

बढ़िया ग़ज़ल है आ. बृजेश जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 23, 2018 at 1:08pm

बिलकुल आदरणीय तस्दीक़ जी...अभी ज्यादा कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूँ..आप जयादा जानकर हैं लेकिन जो संशय है उसका दूर होना आवश्यक है।सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 22, 2018 at 9:36pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , कुहरा और कुहर दोनो शब्द हिन्दी के हैं , कोहरा नाम का कोई शब्द
डिक्सनरी में है ही नहीं ---देखिएगा

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 22, 2018 at 8:32pm

आदरणीय राम अवध जी आपका हार्दिक आभार...सादर

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