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ग़ज़ल (यूँ नहीं मैं ने ज़माने से बग़ावत की है )

(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन)

यूँ नहीं मैं ने ज़माने से बग़ावत की है |
मुझ से उस शोख़ ने बे लौस मुहब्बत की है |

दिल ने मजबूर बहुत कर दिया मुझको वर्ना
मैं ने कब मर्ज़ी से उस शोख़ की हसरत की है |

मुझ से उम्मीद वफ़ा की है उसी को यारो
उम्र भर जिसने मेरे साथ अदावत की है |

रहनुमाई के लिए मैं ने चुना था जिसको
हाए उसने भी मेरे साथ सियासत की है |

सोच लेना वो कोई ग़ैर नहीं अपने हैं
तुमने जिनसेमेरीमहफ़िल में शिकायत की है |

यक बयक हो गये तब्दील किसी के तेवर
मुझ पे क्या ख़ूब अज़ीज़ों ने इनायत की है |

करते फिरते हैं बुराई मेरी तस्दीक़ वही
मैं ने कब ज़ाहिरा उनकी कोई फ़ितरत की है |


( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 5:23pm

मुहतरम जनाब अजय साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mahendra Kumar on December 28, 2017 at 2:59pm

बढ़िया अशआर से सजी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. तस्दीक़ जी. सादर.

Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2017 at 2:25pm

आद0 तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। बहुत खूब। शैर दर शैर दाद औऱ मुबारकबा क़ुबूल करें। यह शैर बहुत पसंद आया

यक बयक हो गये तब्दील किसी के तेवर 

मुझ पे क्या ख़ूब अज़ीज़ों ने इनायत की है |

Comment by Ajay Tiwari on December 28, 2017 at 1:43pm

आदरणीय तस्दीक साहब, उम्दा अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 9:41am

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 9:40am

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 9:39am

मुहतर्मा कल्पना साहिबा, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on December 28, 2017 at 8:39am
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, क्या कहने..
बेहतरीन शेरो से सजी उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।
Comment by Samar kabeer on December 27, 2017 at 10:24pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on December 27, 2017 at 10:09pm

खुबसूरत ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय| हार्दिक बधाई|

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