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सब जन हैं आगोश में, धुन्ध धुएँ के आज

अतिशय कम है दृश्यता, सभी प्रभावित काज

सभी प्रभावित काज, नहीं कुछ अपने कर में

जन जीवन बेहाल, छुपे सब अपने घर में

यहीं रहा जो हाल, धुन्ध होगी और सघन

इसका एक निदान, अभी से सोचें सब जन।1।

बच्चे मानों पट्टिका, चाक आपके हाथ

चाहे इच्छा जो लिखें, उनके ऊपर नाथ

उनके ऊपर नाथ, असर वो होगा गहरा

परखें उनके भाव, यथोचित देकर पहरा

दिए जरा जो ध्यान, बनेंगे फिर वो सच्चे

कच्चे घड़े समान, सदा ही होते बच्चे ।2।

बोया पेड़ बबूल का, मिले कहाँ से आम

वक़्त रहे चेते नहीं, उसका यह परिणाम

उसका यह परिणाम, सभी बच्चे हैं बिगड़े

घिर व्यसनों के बीच, राह सुत सही न पकड़े

बचपन के दिन चार, सवारें उनको गोया

हाथ मलेंगे आप, अगर संस्कार न बोया।3।

जाना इक दिन छोड़कर, सबको अपना देह

सुंदर शुभ सत्कर्म से, जोड़ें हम सब नेह

जोड़ें हम सब नेह, रखे ना बैर किसी से

मय को दें हम त्याग, मिले सब दुःख उसी से

करें आत्म का ज्ञान, छिपा जो एक खजाना

चले ब्रह्म की ओर, जिसे सन्तों ने जाना।4।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 16, 2017 at 8:39pm

उत्तम..बहुत उत्तम शिक्षाप्रद रचना..बधाई

Comment by Samar kabeer on December 14, 2017 at 5:19pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बहुत बढ़िया कुण्डलिया छन्द हुए,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 4:05pm

आपकी कंडलियों का आनन्द आ गया, आ० सुरेन्द्र जी।

Comment by नाथ सोनांचली on December 14, 2017 at 8:34am

आद0 रामबली गुप्ता जी सादर अभिवादन। रचना पर आपके सुझावों का सादर स्वागत हैं। बहुत बहुत आभार आपका।

Comment by नाथ सोनांचली on December 14, 2017 at 8:32am

आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया और मेरी रचना को आपके द्वारा दिया गया प्यार दोनों मुझे तोष देता है। हर विधा में कुछ लिखने की तीव्र इच्छा और गुरुजन का आशीष है कि मैंने इस विधा में भी कुछ लिखने का प्रयास किया। आपने उत्साह बढ़ाया, आपका अतिशय आभार।

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:18am

देश को शेष पढ़ें

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:17am

सुरेन्द्र जी प्रवाह शिल्प और गेयता के हिसाब से दूसरी तीसरी और चौथी कुंडलिया बढियाँ हैं। प्रथम कुंडलिया में अटकाव है।

'धुंध होगी और सघन' ,,,,,,,,गेयता बन नही पायी

देश सब ठीक है।

हार्दिक बधाई स्वीकारें।सादर

Comment by Mohammed Arif on December 13, 2017 at 8:04am

आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब,

                                 बदलते मौसम के प्रभाव , शिक्षा संस्कार , सांसारिक इच्छा , बच्चों की चिंता  बुरी लत आदि को रेखांकित और प्रभाव को दर्शाती सशक्त कुंडलियाँ । आपकी कंडलियों से पहला संवाद क़ायम हो रहा है । अच्छा लगा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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