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ओ निश्छलता!
क्यों नहीं हो मेरे मन में?
रहती क्यों,
नवजात शिशु के,
मुखमंडल में,
तुम क्यों रहती!
स्वच्छाकाश,
चंद्र-तारे
और धरातल में,
तुम क्यों रहती!
हवा के झोंकों,गिरि की सुंदरता,
उन्मुक्त गगन में,
क्यों नहीं हो मेरे मन में?
तुम क्यों रहती!
नदी की लहरों,
फूलों के चेहरों और हरियाली में,
क्यों रहती तुम!
माॅं की ममता,
दुआओं और खुशहाली में,
हर वक्त हर घड़ी,
दे रही हो साथ,
प्रभु के दिये,
इस जीवन में,
फिर, क्यों नहीं रख पाता मैं,
तुझे अपने कर्मों के कंपन में,
ओ निश्छलता!
क्यों नहीं हो मेरे मन में!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Manoj kumar shrivastava on November 29, 2017 at 8:09am

सादर आभार आदरणीय श्री मुसाफिर जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 28, 2017 at 11:15pm

हार्दिक बधाई ।

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 27, 2017 at 9:26pm

आदरणीय श्री उस्मानी जी , आपकी बधाईयां मैं शिरोधार्य करता हूं। आशा करता हेूं कि आपका स्नेह और आशीर्वाद इसी तरह मुझे प्राप्त होता रहेगा। सादर आभार।

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 27, 2017 at 9:23pm

आदरणीय श्री  सुरेन्द्रनाथ सिंह जी, इस समर्थन हेतु आपका कोटिशः आभार

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 27, 2017 at 9:20pm

परम आदरणीय श्री समर कबीर जी आपका कोटिशः आभार, आपके समर्थन से ही मेरा उत्साह बढ़ता है।
सादर धन्यवाद स्वीकार कीजिएगा।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 27, 2017 at 9:11pm
वाह। बार-बार पढ़ने और वाचन करने को प्रेरित करती बढ़िया भावपूर्ण रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और शुभकामनाएं आदरणीय मनोज कुमार श्रीवास्तव जी।
Comment by नाथ सोनांचली on November 27, 2017 at 6:42pm
आद0 मनोज कुमार श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषय को कविता के लिए चुना आपने, इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये। सादर
Comment by Samar kabeer on November 27, 2017 at 3:09pm
जनाब मनोज कुमार जी आदाब,बढ़िया प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Manoj kumar shrivastava on November 27, 2017 at 8:08am

आपका कोटिशः आभार आदरणीय आरिफ जी, आपका स्नेह और आशीर्वाद बना रहे।

Comment by Mohammed Arif on November 26, 2017 at 6:16pm
आदरणीय मनोज कुमार जी आदाब,
निश्छलता को केंद्र में रखकर लिखी गई अच्छी कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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