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मुझे भी कुछ कहना है – लघुकथा -

 मुझे भी कुछ कहना है –  लघुकथा -

 "माँ, मुझे कुछ पल अकेला छोड़ दो। मुझे एकांत चाहिये"।

"ठीक है नीरू, पर तू अंधेरे में क्या कर रही है? तेरे दिमाग में कुछ ऐसा वैसा तो नहीं चल रहा"।

"माँ, आपकी बेटी इतनी कमजोर नहीं है"।

"मैं जानती हूँ। इसीलिये तो डर लगता है। तू यह लिखना छोड़ क्यों नहीं देती"?

"माँ, आप कैसी बात कर रहे हो? वह मेरी गुरू थी। मेरी आदर्श थी। उसे गोलियों से उड़ा दिया।  और मैं चुप हो कर बैठ जाऊँ। असंभव"।

"बेटी, मुझे तेरी जान की चिंता है। जिस काम में जान का खतरा हो उसे छोड़ देना चाहिये"।

"माँ, तो फिर एक काम करो।  सबसे पहले भैया की सेना की नौकरी छुड़वा दो। उनकी जान को तो और भी ज्यादा खतरा है। उनकी तो अभी पोस्टिंग भी बार्डर पर है"।

"नीरू, तेरा भाई देश के दुश्मनों से लड़ रहा है"।

"माँ, मैं भी वही कर रही हूं। ये दुश्मन बाहरी दुश्मनों से भी ज्यादा खतरनाक हैं"।

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on September 11, 2017 at 10:07am

हार्दिक आभार आदरणीय सलीम राज़ा साहब जी।

Comment by SALIM RAZA REWA on September 10, 2017 at 10:37pm
आ. तेज वीर जी ख़ूबसूरत संदेश देती हुई, लघुकथा के लिए बधाई,
Comment by TEJ VEER SINGH on September 10, 2017 at 9:59pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब  जी।आदाब।

Comment by TEJ VEER SINGH on September 10, 2017 at 9:58pm

हार्दिक आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी

Comment by Samar kabeer on September 10, 2017 at 9:14pm
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mahendra Kumar on September 10, 2017 at 8:09pm

बढ़िया लघुकथा है आ. तेज वीर सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. एक बार शीर्षक को पुनः देख लीजिएगा. सादर.

Comment by TEJ VEER SINGH on September 10, 2017 at 11:32am

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on September 10, 2017 at 11:31am

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 9, 2017 at 10:37pm
महिला सैनिक पुलिस के लिए वर्तमान में बनी सकारात्मक परिस्थितियों पर बढ़िया प्रेरक प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 9, 2017 at 10:11pm
बहुत बढ़िया लघुकथा सीधे दिल से सम्बाद करती है इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर

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