For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िंदगी...

ज़िंदगी का 

हासिल
है
मौत
क्या
मौत का
हासिल
है
ज़िंदगी ?

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 64

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 17, 2017 at 5:33pm

आदरणीय narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on August 14, 2017 at 1:27pm

बहोत सुन्दर 

Comment by Sushil Sarna on August 13, 2017 at 6:59pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... सृजन के भावों को आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 13, 2017 at 6:59pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब, सृजन के मर्म को स्वीकृति देती आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on August 13, 2017 at 6:15pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत मुख़्तसर कविता,सुंदर कविता,और अंत में एक अनबुझ सवाल,बहुत ख़ूब, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on August 13, 2017 at 6:15pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ज़िंदगी और मौत को परिभाषित करती अतिलघु कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब अफ़रोज़ 'सहर'साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता…"
9 minutes ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post बिखराव
"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,जज़्बात की ज़मीन पर शब्दों की बहुत सुंदर और शानदार इमारत तैयार करना आपका…"
21 minutes ago
dilbag virk replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आंखों के सामने सदा मंज़िल हसीं रहे भूलें न खुद को, पैरों के नीचे जमीं रहे । ये मुश्किलें डराती है…"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजीत शर्मा जी आदाब, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । दिली मुबारकबाद क़बूल कीजिए ।"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए…"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"बहुत बेहतरीन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय इमरान खान जी ।"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"यूँ तो सहर हैं प्यार में रुस्वाइयाँ बहुत। लेकिन बग़ैर इसके भी कोई नहीं रहे।। बहुत ख़ूब!! मज़ा आ गया…"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"दुनिया के ग़म को पास फटकने नहीं दिया ता उम्र हम तुम्हारे ही ग़म के अमीं रहे वाह! वाह!! मज़ा आ गया…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये।
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । शे'र दर शे'र दाद के…"
1 hour ago
Rakshita Singh posted a blog post

अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये।

रोते रहे खुद, मुझको हँसा कर चले गये-काफ़िर से अपना दिल वो लगाकर चले गये।पूँछा जो उनसे घर का पता…See More
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service