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क्या तुम सुन रहे हो ? ( कविता)

फिर आ गयी है रात 

पूनम के बाद की 

खिला हुआ चाँद 

कह रहा है कुछ 

क्या तुम सुन रहे हो ? 

तारों से कर रहें हैं  बातें 

तन्हा बीत जाती हैं रातें 

देखता है  यह चाँद यूँही 

हँसता होगा यह भी देख मुझको 

क्या तुम सुन रहे हो ?

साथ चलने को कहा था 

थामकर हाथ चल रहे थे 

फिर क्या हुआ यकायक 

कैसे गरज गए यह बादल 

क्या तुम सुन रहे हो 

चमक रही है बिजली 

चाँद भी अब चल देगा 

बादलों के अँधेरे में 

फिर होगी वर्षा लगता है 

क्या तुम सुन रहे हो ?

पर नहीं ,

नहीं हो तुम आस पास कहीं भी 

इतने शोर में भी खामोश है 

दुनिया मेरी 

क्या तुम सुन रहे हो ?

मौलिक और अप्रकाशित 

 

Views: 798

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Comment by sunanda jha on August 13, 2017 at 2:26pm
Beautiful ,बहुत प्यारी भावपूर्ण कविता आदरणीया कल्पना जी दिल से बधाई इस सुंदर सृजन के लिए ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 10, 2017 at 8:05pm
बहुत सुन्दर भावपूर्ण आदरणीया..सादर
Comment by narendrasinh chauhan on August 10, 2017 at 12:14pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 9, 2017 at 8:17pm

धन्यवाद आदरणीय गिरिराज सर |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 9, 2017 at 8:16pm

आदाब आदरणीय समर भाई जी | आपको यह प्रयास पसंद आया सार्थक हुआ यह प्रयास | सादर धन्यवाद भाई जी |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 9, 2017 at 8:15pm

धन्यवाद् आदरणीय शहजाद भाई |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 9, 2017 at 8:15pm

धन्यवाद आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 9, 2017 at 8:13pm

धन्यवाद आदरणीया वसुधा जी |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 9, 2017 at 6:45pm

आदरणीया कल्पना जी , सुन्दर भाव पूर्ण कविता के लिये आपको बधाइयाँ ।

Comment by Samar kabeer on August 9, 2017 at 6:32pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,बहुत सुंदर और जज़्बाती कविता लिखी आपने,प्रवाह और शिल्प भी उम्दा है, इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
आठवीं पंक्ति में 'हैं' को "है" कर लें ।

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