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कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास - निलेश नूर

कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास 
.
बोझ बढ़ा आवाम पर मगर न आई लाज
लगी लेखनी को अजब भक्तिभाव की खाज.
भक्तिभाव की खाज जो आधी रात जगाये
अपनी बरबादी का ज्ञानी जश्न मनाये. 
व्यापारी का देश में बुरा हुआ है हाल
मौजी निकला घूमने.. देश करे हड़ताल.
.
.
अठरह फी से दिक्कत थी अट्ठाईस से प्यार
बड़े ग़ज़ब के तर्क हैं बड़े ग़ज़ब सरकार.
बड़े ग़ज़ब सरकार लगे जी एस टी प्यारा
भक्ति करेंगे और बनेंगे हम ध्रुव तारा.
पूजन सामग्री औ बस्ता टैक्स नेट में आया
माँस हुआ करमुक्त जो सबने दाब के खाया.      
.
.
आतंकी अल-क़ायदा किया बहुत उत्पात 
लेकिन अब अल-गाय दा छाया रातों रात 
छाया रातों रात मुल्क की शान घटी है 
सिले हुए हैं लब, तुम्हारी ज़बां कटी है.
कहे नूर कविराय हटाओ गौरक्षक को 
प्रेमभाव के और तरक्की के भक्षक को.  
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 981

Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 21, 2017 at 7:34am

 धन्यवाद आ. सौरभ सर,
विधान की कमियाँ इंगित करेंगे तो जल्दी सीख पाउँगा 
सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 17, 2017 at 3:14pm

प्रयास ने मुग्ध किया है. अलबत्ता भाव प्रस्तुतीकरण की उत्कट अपेक्षा ने प्रयुक्त छंद के  विधान से कितनी सहजता से वंचित रखा कि रचनाकार को इसका भान भी न रहा. किन्तु, पूर्ण विश्वास है, ग़ज़ल विधा के बहुमुखी जानकार विधाओं के विधान और इनकी महत्ता को अवश्य समझेंगे.

आदरणीय नीलेश भाई, सतत प्रयासरत रहें. 

शुभ-शुभ

Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 16, 2017 at 5:25pm

धन्यवाद सभी का 

Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 5:02pm

    बड़े ग़ज़ब सरकार लगे जी एस टी प्यारा 
भक्ति करेंगे और बनेंगे हम ध्रुव तारा...वाह  आदरणीय  Nilesh Shevgaonkar जी , आपकी गज़लें तो खूब पढ़ीं हैं , पहली बार आपके इस रचना  पक्ष  का  भी भान हुआ , बधाई ! सादर 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 3:55pm

अरे वाह ग़ज़लकार छंद पर प्रयास कर रहे हैं यह ओबीओ पर ही देखने को मिलता है | वाह आदरणीय सुंदर प्रयास हुआ है | हार्दिक बधाई |

Comment by narendrasinh chauhan on July 13, 2017 at 6:14pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by khursheed khairadi on July 13, 2017 at 7:23am
सुन्दर कुण्डलिया आदरणीय नीलेश सर बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on July 12, 2017 at 10:17pm
आद0 नीलेश जी सादर अभिवादन, हमे आपकी कुण्डलिया पसन्द आईं। बधाई इस सृजन पर
Comment by Mohammed Arif on July 12, 2017 at 10:16pm
आदरणीय नीलेश नूर जी आदाब, बेहतरीन कुंडलिया । इशारों-इशारों में सबकुछ बयाँ कर दिया आपने । वैसे भी जी.एस.टी. पूरे देश के लिए जी का जंजाल बन गया है । कभी-कभी अर्थ व्यवस्था के ऊपर ज्यादा प्रयोग भी घातक सिद्ध होते है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । शिल्प के संदर्भ में गुणीजन सबकुछ बता चुके हैं ।
Comment by Mahendra Kumar on July 12, 2017 at 8:45pm

आ. निलेश जी, छंद के विषय में कुछ कह पाने की स्थिति में तो मैं नहीं लेकिन इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि इसका भाव पक्ष ज़बरदस्त है. बहुत सीधी और सटीक चोट की है आपने. मेरी तरफ़ से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

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