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ग़ज़ल(रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक)

221 1221 1221 122

रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक,
खुशियों का ये दे सबको असर ईद मुबारक।

घुल आज फ़िज़ा में हैं गये रंग नये से,
कहती है ये खुशियों की सहर ईद मुबारक।

पाँवों से ले सर तक है धवल आज नज़ारा,
दे कर के दुआ कहता है हर ईद मुबारक।

सब भेद भुला ईद गले लग के मनायें,
ये पर्व रहे जग में अमर ईद मुबारक।

ये ईद है त्योहार मिलापों का अनोखा,
दूँ सब को 'नमन' आज मैं कर ईद मुबारक।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by नाथ सोनांचली on July 2, 2017 at 2:54pm
आद0 बासुदेव जी सादर अभिवादन। उम्दा गजल पर बधाई स्वीकारें।
Comment by vijay nikore on July 2, 2017 at 2:03pm

अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 28, 2017 at 12:58pm
मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब, ईद पर अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:34pm
आ0 श्याम नारायण वर्मा जी बहुत बहुत आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:33pm
आ0 ब्रजेश कुमार जी आपका हृदय तल से आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:32pm
आ0 समर कबीर साहिब ईद की बधाई और हौसला आफजाई का हृदय से आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:30pm
आ0 महेंद्र कुमारजी आपके उत्साहवर्धन का हृदय से आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:29pm
मोहम्मद आरिफ भाई जान आपको भी ईद की बहुत बधाई और ग़ज़ल में शिरकत का तहे दिल से शुक्रिया।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on June 27, 2017 at 5:27pm
आ0 गोपाल नारायण जी आपका हृदय से आभार।
Comment by Shyam Narain Verma on June 27, 2017 at 5:03pm
बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।

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